ए राजा, कनिमोझी व मारन के बाद 2जी में फंसे चिदंबरम

प्रणव मुखर्जी की पीएमओ को लिखी इस चिट्ठी ने न सिर्फ कांग्रेस में भूचाल ला दिया बल्कि राजनीति की सरगरमियां तेज कर दीं। सभी विपक्षी दल एकजुट होकर चिदंबरम से इस्तीफे की मांग करने लगे। अपने ही मंत्री द्वारा लगे आरोंपों से खिन्न चिदंबरम ने अमेरिका दौरे पर गए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को फोन कर इस्तीफे की पेशकश कर दी। प्रधानमंत्री ने उनकी इस पेशकश को ठुकराते हुए चिदंबरम पर भरोसा जताते हुए उन्हें इस्तीफा न देने की हिदायत दी थी। पीएम के इस भरोसे के बाद कांग्रेस एकजुट हो चिदंबरम के साथ आ खड़ी हुई।
पिछले काफी समय से कांग्रेस मुश्किलों के दौर से गुजर रही है। भ्रष्टाचार मामले पर अन्ना हजारे ने उनकी किरकिरी की। इसके बाद महंगाई ने जनता को कांग्रेस के खिलाफ खड़ा कर दिया। देश पर होने वाले आतंकी हमलों ने भी कांग्रेस और गृहमंत्री पी चिदंबरम पर दबाव बनाया। अब 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के बाद चिदंबरम विपक्ष व अपनों के निशानें पर आ गए हैं। अब देखना है कि प्रधानमंत्री की वतन वापसी के बाद वे चिदंबरम पर क्या निर्णय लेता है। विपक्ष वैसे भी प्रधानमंत्री पर यह आरोप लगा चुकी है कि जब उनका कोई मंत्री भ्रष्टाचार में लिप्त होता है तो पीएम की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आती है लेकिन जब क्लीन चिट देने की बारी आती है तो वे सबको क्लीन चिट दे देते हैं।
2जी स्पेक्ट्रम मामले में चिदंबरम का नाम पहली बार सामने नहीं आया है। इस घोटाले के मुख्य आरोपी ए राजा पहले ही कह चुके हैं कि तत्कालीन वित्तमंत्री पी चिदंबरम को इस पूरे मामले की जानकारी थी। 2008 में 2जी स्पेक्ट्रम के लाइसेंसों को 2001 की कीमत पर बेचने का निर्णय भी वित्तमंत्री ने ही लिया था। सरकार ने उस समय 2जी स्पेक्ट्रम की नीलामी नहीं कराई थी। जिससे सरकार को लगभग 1 लाख 76 करोड़ का नुकसान हुआ था। 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में अब देखना है कि कांग्रेस के किसी बड़े नेता यानि चिदंबरम की बलि चढ़ती है कि नहीं।












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