चुनाव पास आते ही मायावती को आयी जनता की याद

प्रदेश में पहले से ही जनहित गारंटी कानून को लागू है। गत 15 जनवरी को अपने जन्मदिवस के मौके पर मायावती ने इस कानून के लागू होने की घोषणा की थी। चुनाव की आहट के साथ ही उन्होंने अधिकारियों के पेंच कसने शुरू कर दिये। हालांकि बसपा ने सफाई दी है कि आम जनता के सशक्तिकरण के लिये जनहित गारंटी कानून को लागू किया गया है ताकि इसके तहत आने वाली सेवायें निर्धारित समय में आम जनता को उपलब्ध हो सकें।
मायावती ने कहा है कि बसपा सरकार ने जनहित की ऐसी सेवाओं को जनहित गारंटी कानून के तहत चिन्हित किया है जिसकी सबसे ज्यादा जरूरत समाज के कमजोर और गरीब वर्ग को होती है। जनहित कानून जनता के लिए उपयोगी बताते हुए उन्होंनें कहा कि जनहित गारंटी कानून के तहत तेरह सेवाओं को अधिसूचित किया गया है। अधिसूचित की गयी सेवाओं में वृद्धि करते हुये खासतौर पर परिवहन से जुड़ी सेवाओं को भी इसमें शामिल किया गया है।
मुख्यमंत्री ने इस कानून के व्यापक प्रचार प्रसार के निर्देश भी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को जारी किये। उन्होंने कहा कि निर्धारित समय में सेवा उपलब्ध नहीं कराने पर जुर्माने का भी प्रावधान कानून में है। जुर्माने की राशि संबंधित अधिकारी से वसूल कर उसका भुगतान आवेदक को देने की व्यवस्था की गयी है। मु यमंत्री द्वारा जिलाधिकारियों और मंडलायुक्तों को भेजे निर्देश में कहा गया है कि कानून के क्रियान्वयन में ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों को दंडि़त किया जाये।
जिलाधिकारियों को दिये निर्देश में यह भी कहा गया है कि हर सप्ताह जिले की किसी एक तहसील के एक गांव का निरीक्षण किया जाय तथा उपजिलाधिकारी हर महीने पांच गांव का दौरा करें। मायावती ने समस्त विभागों में लंबित सतर्कता अभियोजन संबंधी मामले में निर्णय की समय सीमा भी तय करने के निर्देश दिये और कहा कि भ्रष्टाचार में लिप्त बड़े अधिकारियों को रंगे हाथ पकड़ने के लिये सूचना एकत्रित किया जाये।












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