मोदी को लेकर सुषमा-महबूबा में छिड़ी जंग
उनकी नजर में गुजरात ही एक ऐसा राज्य है जहां मुसलमानों के साथ कोई भेदभाव नहीं हुआ। मोदी भाई ने, एक उद्योगपति जो कि मुसलमान था, उसे गुजरात में बिना किसी शर्त के मौका दिया। जिस पर प्रतिक्रिया देते हुए महबूबा मुफ्ती ने कहा कि उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं कहा था। उन्हें समझ में नहीं आ रहा कि सुषमा स्वराज ने ऐसा क्यों कहा। उन्होंने भारत सरकार से प्रार्थना की है कि वो एनआईसीकी बैठक की टेप को सार्वजनिक करें जिसके चलते दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा। आखिर सुषमा जी अपने भाई के कसीदे पढ़ते-पढ़ते मेरा नाम क्यों ले बैठीं?
इस बयान के बाद एक नयी बहस के आसार दिख रहे है। इस बहस पर भाजपा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिसके तहत ये प्रश्न उठ रहा है कि क्या जानबूझकर भाजपा मोदी को मुसलमानों का मसीहा साबित करने में जुटी हुई है। सुषमा स्वराज जिनका की एक राजनैतिक कद है और जिनकी लोग सुनते हैं, उन्होंने सार्वजनिक रूप से झूठ क्यों बोला?
आखिर इसके पीछे मंशा क्या है जबकि वहीं महबूबा मुफ्ती पर भी प्रश्न उठ रहे हैं कि क्या वो वाकई में सच बोल रही हैं? क्योंकि उनका इतिहास रहा है कि वो अक्सर अपने पुराने बयान भूल जाती है। लेकिन इस बार तो उन्होंने चैलेंज के साथ अपने बयान को सार्वजनिक करने की बात कही है। खैर देखना दिलचस्प होता है कि आखिर कौन है सच्चा और कौन है झूठा?
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