भूकंप ने पिछड़े सिक्किम को किया तबाह, मरने वालों की संख्या 66

सिक्किम में 100 से भी ज्यादा इमारतें इस भूकंप की चपेट में आ गई हैं। भूकंप की वजह से वहां भूस्खलन हुआ है। जिस वजह से गंगटोक का संपर्क अन्य दूसरे इलाकों से टूट गया है। पहाड़ी इलाका होने की वजह से इस भूकंप का असर दिखाई दिया। यहां की सड़कें जगह जगह पर धंस गईं। भूकंप के बाद बिजली व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो गई। इसके अलावा यहां की फोन व्यवस्था भी पूरी तरह ठप हो गई।
सिक्किम की बात करें तो यह गोवा के बाद सबसे छोटा राज्य है। यहां की आबादी लगभग 5 लाख है। टूरिज्म यहां का मुख्य व्यवसाय है। पिछले कुछ साल से राज्य सरकार ने टूरिज्म को काफी बढ़ावा दिया है जिससे यहां से टूरिज्म से होने वाली आमदनी पहले से 14 गुनी हो गई है। टूरिज्म के साथ यहां कसीनो के व्यवसाय को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
पहाड़ी क्षेत्र होने की वजह से यहां रेल व्यवस्था सुगम नहीं है। सिलीगुड़ी तक ट्रेन की पटरी बिछाई गई है। राज्य में शहरों को जोड़ने के लिए सरकार की तरफ से प्रोजक्ट चलाया जा रहा है जो आगामी 4 साल में पूरा हो जाए। सिक्किम में हवाई अड्डा नहीं है। जिस वजह से यहां हवाई यात्रा की सुविधा नहीं है। यहां का नेशनल हाईवे 31 कई शहरों को आपस में जोड़ता है।
भूकंप ने सिक्किम की अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान पहुंचाया है। सरकारी से लेकर निजी इमारतों में दरारे आ गई हैं। केंद्र सरकार ने इस प्राकृतिक आपदा में सिक्किम की जनता को राहत पहुंचाने के लिए सेना के जवानों को भेजा है। आईटीबीपी के 700 जवान राहत व बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। ये कहा जा सकता है कि इस भूकंप ने पहले से पिछले हुए सिक्किम को कई साल पीछे धकेल दिया है।












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