चिदंबरम ने आतंकवाद और नक्सलवाद से मानी हार

कार्यशाला का उद्घाटन करने के बाद चिदंबरम ने कहा कि नक्सल प्रभावित जिलों में शासन चलाने का जिम्मा राज्यों से केंद्र को स्थानांतरित नहीं होना चाहिए। हम हर तरह से मदद करेंगे, लेकिन अंतिम तौर पर राज्य सरकारों को ही नक्सल प्रभावित जिलों में उनके द्वारा उठाए जाने वाले कदमों की जिम्मेदारी लेनी होगी। देश में आतंकवाद के मुकाबले वामपंथी उग्रवाद सबसे बड़ी चुनौती है। यह आंदोलन अत्यंत भयानक और बर्बर विचार से संचालित होता है। इसका उद्देश्य संसदीय लोकतंत्र को उखाड़ फेंकना है।
इस कार्यशाला में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी मौजूद थे। उन्होंने नक्सल प्रभावित जिलों के कलेक्टरों से कहा कि वे उन क्षेत्रों के विकास के लिए व्यवहारिक हल खोजे तथा विकास योजनाओं को तेजी से क्रियान्वित करें जिससे लोगों के जीवन स्तर में सुधार हो सके।
कार्यशाला में जिलाधिकारियों ने बताया कि इस इलाके में सबसे बड़ी समस्या संपर्क साधनों का है। इसे दूर करने की जरूरत है जिसके लिए इस कार्यशाला में सभी गांवों को प्रधानमंत्री सड़क योजना की सड़कों से जोड़ने के लिए अगले तीन साल के 35 हजार हजार करोड़ रुपये की जरूरत बताई गई। ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि वे इस बाबत अगले सप्ताह वित्त मंत्री के साथ बातचीत करेंगे।
ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने बताया कि इंदिरा आवास योजना में नक्सलवाद प्रभावित सभी लोगों को इंदिरा आवास उपलब्ध कराए जाएंगे। इन जिलों में प्रधानमंत्री ग्रामीण विकास फेलो प्रोग्राम के तहत प्रत्येक जिले में तीन युवा प्रोफेशनल दो से तीन वर्षो के लिए नियुक्त किए जाएंगे। ये युवा कार्यकर्ता सरकारी प्रणाली के भीतर रहकर समस्या के समाधान के लिए काम करेंगे।












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