लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्राओं व कुलपति में हाथापाई

लाला महादेव प्रसाद वर्मा डिग्री कालेज, महिला महाविद्यालय, आईटी कालेज व लखनऊ विश्वविद्यालय की बीए तथा बीएससी की कुछ छात्राएं प्रेक्टिकल व लिखित परीक्षा में पास नहीं हो सकीं। फेल होने के बाद छात्राओं ने कापियां दिखाने की मांग की। मांग को पूरा न होता देख उन्होंने सूचना के अधिकार का प्रयोग करते हुए कापियां दिखाने का आवेदन किया। लखनऊ विश्वविद्यालय ने मंगलवार को कापियां दिखाने का वायदा किया लेकिन मंगलवार को छात्राओं ने जब प्रशासनिक भवन में सम्पर्ककिया तो कोई सही जवाब नहीं मिला।
छात्राओं ने कुलपति प्रो. मनोज कुमार मिश्र से मिलने का प्रयास तो उन्होंने मिलने से मना कर दिया। फिर क्या था छात्राएं भड़क उठीं और परिसर में हंगामा शुरू हो गया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने उनका साथ दिया और प्रशासनिक भवन में तोडफ़ोड़ शुरू कर दिया। कुलपति गुस्से में बाहर आए तो उन्हें छात्राओं के गुस्से का सामना करना पड़ा। छात्राओं को फटकारने के बाद जब छात्राओं ने मोबाइल से उनकी फोटो खींचनी शुरू की तो वह दोबारा अपने कक्ष में चले गए।
सूचना मिलने पर कुछ मीडिया कर्मी भी मौके पर पहुंचे तो प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सदस्यों ने उनके कैमरे भी तोड़ दिए। इस घटनाक्रम में परिसर में ऐसे हालत हो गए जैसे सात वर्ष पूर्व हुआ करते थे जब छात्र हावी था और आए दिन परिसर में छात्र हंगामा करते दिखायी देते थे। प्रशासन ने पुलिस को सूचना दी तो पुलिस के कई अधिकारी मौके पर आ गए लेकिन छात्राओं ने उनकी गाडिय़ों को बीच रास्ते में ही रोक दिया। नारेबाजी हंगामा चीख पुकार के बीच छात्राएं बेहोश होती रही लेकिन अपने हक की लड़ाई में पीछे हटने को तैयार नहीं थी।
छात्राओं का आरोप था कि उन्हें जानबूझकर फेल किया गया। काफी देर के बाद कुलपति प्रो. मिश्र पुलिस के साथ अपने कमरे से बाहर आए तो छात्राओं ने उनकी हाथापाई हो गयी। कुलपति को पुलिस कर्मियों ने जैसे तैसे भीड़ से बाहर निकाला। कुलपति का तर्क था कि कापियां को दोबारा जांचा जा चुका है मूल्यांकन में किसी प्रकार की गलती नहीं है। पुलिस ने हंगामा कर रहे एबीवीपी के चार कार्यकर्ताओं मिथलेश त्रिपाठी, रोहित सिंह, विश्वगौरव व सूरज सिंह को हिरासत में लिया लेकिन बाद में छात्राओं द्वारा चौकी पर हंगामा करने तथा निजी मुचलके पर उन्हें छोड़ दिया गया। अधिकाकारियों का कहना है कि विवि प्रशासन की लापरवाही के कारण यह हालात पैदा हुए इससे बचा जा सकता था।












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