सांप्रदायिक हिंसा विधेयक देशहित में नही: चिन्मयानन्द
लखनऊ। साम्प्रदायिक हिंसा विधेयक पर विरोध प्रखर होने लगा है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री स्वामी चिन्मयानन्द का मानना है कि इस विधेयक को मंजूरी नहीं दी जानी चाहिए क्योंकि यह देशहित में नहीं है।
स्वामी चिन्मयानन्द विधेयक को असंवैधानिक, अलोकतान्त्रिक, अव्यावहारिक और अमानवीय बताते हुए कहा कि यह केवल अल्पसं यकों को खुश करने के लिये तैयार किया गया है। विधेयक पर आपत्ति जताते हुए उन्होंने सरकार को भी चेतावनी दी है कि इसे लागू न किया जाये।
उन्होंने कहा कि अगर यह कानून बनाया गया तो इसका व्यापक विरोध होगा। उनका तर्क है कि इस विधेयक में दिये गये प्रस्ताव भारतीय संविधान के मूल चरित्र के विरूद्ध और समाज को बांटने वाले हैं। उन्होंने कांग्रेस को राष्ट्ररविरोधी बताते हुए कहा कि राष्ट्रीय एकता परिषद ने इस विधेयक को इनकार करके कांग्रेस की राष्ट्र विरोधी साजिश को बेनकाब कर दिया है।
भाजपा नेता ने कहा कि इस विधेयक में देश के नागरिकों को समूहों में बांट दिया गया है। विधेयक के विरोधाभास बिन्दुओं को उजागर करते हुए उन्होंने कहा कि अल्पसं यकों, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जन जातियों को जहां समूहों की संज्ञा दी गयी है वहीं देश के शेष नागरिकों को अन्य कह कर एक-दूसरे का शत्रु बना दिया गया है।
विधेयक को सा प्रदायिक विरोधी बताते हुए भाजपा नेता ने कहा कि विधेयक में यह भी दर्शाया गया है कि जितने भी दंगे होते है वह सब समूहों को कुचलने के लिये अन्यों के द्वारा आयोजित किये जाते हैं। उन्होंने कहा कि यह विधेयक किसी भी हाल में देशहित में नहीं है, इससे नागरिकों के बीच कटुता बढ़ेगी।












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