इंटेलीजेंस को मजबूत करने की जरूरत: प्रधानमंत्री

सभी वक्ता और राज्य संप्रदायिकता बिल पर ही एक दूसरे पर आरोप मढते रहे। हां, लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने जरूर एनआईसी के इस एजेंडे पर आश्चर्य जताया। क्योंकि उन्होंने कहा कि फिलहाल देश के सामने सबसे बड़ा मुद्दा आतंकवाद और नक्सलवाद है। सांप्रदायिक हिंसा विधेयक नहीं।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने समापन भाषण में कहा, आतंकवाद और नक्सलवाद देश के आगे सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने सभी जांच एजेंसियों से पूर्वाग्रह से मुक्त होकर निरपेक्ष जांच की वकालत की। दिल्ली बम धमाके का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इसने बता दिया है हम अपने निगरानी और चौकसी तंत्र में जरा भी ढील नहीं दे सकते। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ खुफिया तंत्र की कमजोरियां दूर करने की भी बात की। वैसे 26/11 के मुंबई आतंकी हमले से पहले 13 अक्टूबर 2008 को हुई बैठक में प्रधानमंत्री के शब्द थे कि आतंकी संगठनों के संबंध में बेहतर खुफिया सूचना तंत्र की जरूरत है साथ ही जांच के तौर-तरीकों में भी सुधार जरूरी है।
आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियों के मुकाबले सरकारी कोशिशों की फेहरिस्त में प्रधानमंत्री ने बीते दो साल से जारी नेटग्रिड बनाने की कोशिश, तटीय सुरक्षा मजबूत करने के उपाय, केंद्रीय पुलिस बलों को कंप्यूटर से जोड़ने की चल रही कवायद जैसे इंतजामों का ब्योरा ही गिनाया। नक्सलवाद की चुनौती के मोर्चे पर भी प्रधानमंत्री ने हिंसा के साथ सख्ती से निपटने और प्रभावित इलाकों की विकास संबंधी जरूरतों को पूरा करने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने आतंकवाद और नक्सलवाद की चुनौती के मुकाबले में केंद्र और राज्य ही नहीं सूबों के बीच भी बेहतर आपसी तालमेल पर जोर दिया।
सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में सिर्फ और सिर्फ आतंकवाद पर बात होनी चाहिए थी क्योंकि उसका दंश हमलोगों के सामने हैं। हम लोग इसकी तासीर को समझ चुके हैं पर इस बैठक में सभी राज्यों ने डूबे हुए मुद्दे को उठाकर आतंकवाद के खिलाफ अपनी प्रतिबद्धता, अपनी जिम्मेदारी का खुलासा कर दिया है।












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