अब जेल भी जा सकते हैं बसपा बिधायक अवधपाल

मुख्यमंत्री व बसपा प्रमुख मायावती ने उन्हें अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी से निष्कासित कर दिया। कयास यह भी है कि श्री यादव जेल जा सकते हैं क्योंकि लोकायुक्त ने गृह विभाग के गोपन सेक्शन से एक महीने में कार्रवाई के लिए रिपोर्ट मांगी है जबकि सेक्शन ने इसके लिए छह महीने का समय मांगा है। लोकायुक्त का कहना है कि निर्धारित समय में यदि श्री यादव के संबंध में समुचित जवाब नहीं आया तो भ्रष्टाचार की चल रही जांच में रिपोर्ट दर्ज करायी जा सकती है।
इस बीच अंतरिम राहत के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय पहुंचे श्री यादव के हलफनामे से वह स्वयं संदेह के घेरे में आते दिख रहे हैं क्योंकि इस्तीफा देते समय उन्होंने इसका आधार नैतिकता बताया था लेकिन शपथ पत्र में उनका कहना है कि उन पर दबाव बनाकर इस्तीफा लिया गया। इसी बीच लोकायुक्त ने राज्य के श्रम मंत्री बादशाह सिंह को भी जमीन के कब्जे के स बन्ध नोटिस जारी कर उनकी मुश्किलें बढ़ा दी है। श्री सिंह पर आरोप है कि उन्होंने बुन्देलखण्ड क्षेत्र के महोबा जिले में सरकारी जमीन पर कब्जा कर व्यक्तिगत स पत्ति बनायी है।
महोबा जिले के चरखारी विधानसभा क्षेत्र के अखिलेश कुमार उपाध्याय की शिकायत के अनुसार श्रम मंत्री ने सरकारी जमीन पर व्यवसायिक केन्द्र बना दिया है। इस पर पहले सरकारी अस्पताल बनाने की योजना थी। एक अन्य आरोप के अनुसार श्रम मंत्री ने ग्रामसभा की जमीन पर महाविद्यालय की चहारदीवारी बनवा ली है।
इससे पहले लोकायुक्त की रिपोर्ट पर धर्माथकार्य मंत्री राजेश त्रिपाठी का मंत्री पद से हटाया गया था। उन पर गोरखपुर जिले के चिल्लूपार क्षेत्र में एक न्यास के नाम पर श्मशान घाट की भूमि हथियाने का आरोप था। उच्च शिक्षा मंत्री राकेश धर त्रिपाठी व माध्यमिक शिक्षा मंत्री रंगनाथ मिश्र भी लोकायुक्त की जांच के दायरे में आ चुके हैं।












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