सांसदों ने काम किया कम, बर्बाद किया ज्यादा

Another session, same story
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र को याद करने के लिए तो बहुत से कारण हैं मसलन पहली बार इस सत्र में अन्ना के जनलोकपाल को लेकर शनिवार को संसद की विशेष बैठक आहूत की गई, भूमि अधिग्रहण बिल पेश हुआ, राज्यसभा में महाभियोग का प्रस्ताव पारित हुआ और भ्रष्टाचार व महंगाई के मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच काफी नोक झोंक हुई। पर इस सत्र को सबसे ज्यादा इसलिए याद किया जाएगा, क्योंकि इस सत्र में सांसदों ने काम कम किया और समय ज्यादा बर्वाद की।

इसलिए सांसदों की जवाबदेही इस बार सवालों के घेरे में है, क्योंकि ये सांसद संसद की सर्वोच्चता के लिए झंड़ा बुलंद किए हुए थे। सूत्रों ने बताया कि संसदीय कामकाज को लेकर इनकी गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लगभग 1 महीने 8 दिन चले इस सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के झगड़े के चलते दोनों सदनों में लगभग आधा समय बर्बाद हुआ।

गुरुवार को सत्र के आखिरी दिन लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार और राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी दोनों ने ही इस पर आश्चर्य जताया और सदस्यों को उनके फर्ज की याद दिलाई। अंसारी ने कहा, यह सदन की कार्यवाही में सार्थक भागीदारी के सदस्यों के अधिकारों और कर्तव्यों पर एक दुखद टिप्पणी है। आत्म निरीक्षण जरूरी है।

उन्होंने सदस्यों को याद दिलाया कि इस सत्र के दौरान हंगामे की वजह से 53 घंटे बर्बाद हुए। इसी तरह मौखिक जवाब के लिए चुने गए 500 सवालों में सिर्फ 65 का ही जवाब दिया जा सका। इसी तरह मीरा कुमार ने गुरुवार को सदन की कार्यवाही को अनिश्चित काल के लिए स्थगित करते हुए कहा, बड़े दुख की बात है कि हमने 51 घंटे से ज्यादा समय जबरन करवाए स्थगन की वजह से बर्बाद किए।

1 अगस्त से शुरू हुए मानसून सत्र के 39 दिनों के दौरान संसद की 26 बैठकें हुईं। इस सत्र में सरकार को 30 बिल रखने थे, मगर व्यवधान के कारण लोकसभा में सिर्फ 14 और राज्यसभा में सिर्फ 9 बिल पास हो सके। सरकार ने अपना लोकपाल बिल भी संसद में पेश किया पर वह पास होने से पहले ही संसद की स्थायी समिति के पास चला गया वहीं अन्ना के साथ सत्ता संषर्घ के बाद सरकार ने जनलोकपाल बिल पेश किया।

हालांकि बहुत सारी बातें मानी नहीं गई। मानसून सत्र के जाते जवाते केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश जरूर भूमि अधिग्रहण बिल पेश गए पर पास ये भी बिल नहीं हो सका। इसी सत्र के दौरान जरूर इतिहास बना और पहली बार राज्य सभा के इतिहास में हाईकोर्ट के जज सौमित्र सेन के खिलाफ महाभियोग पारित किया गया।

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