सहजधारी सिखों को मिला चुनाव का अधिकार

वर्ष 2003 में केंद्र सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर एसजीपीसी चुनाव में सहजधारी सिखों को वोट डालने के अधिकार से वंचित कर दिया था। हाईकोर्ट के जस्टिस एमएम कुमार, जस्टिस आलोक सिंह और जस्टिस गुरुदेव सिंह पर आधारित फुल बेंच के समक्ष बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार ने बताया कि वर्ष 2003 को केंद्र सरकार ने एसजीपीसी के 30 मार्च 2002 के प्रस्ताव के आधार पर नोटिफिकेशन जारी किया था। इसके अलावा केंद्र सरकार की ओर से इस मामले में पहले दिए गए जवाब भी बृहस्पतिवार को वापस ले लिए गए। लिहाजा हाईकोर्ट की फुल बेंच ने इस केस को खारिज कर दिया है।
रद्द होंगे एसजीपीसी चुनाव
18 सितंबर को एसजीपीसी चुनाव होने वाले हैं। सहजधारी सिखों को मतदान का अधिकार मिलने से 18 सितंबर को होने वाले एसजीपीसी के चुनाव स्थगित होना लगभग तय है। चुनाव के लिए सहजधारी सिखों के नए वोट बनाने की प्रक्रिया में काफी समय लग सकता है, जो गुरुद्वारा चुनाव आयोग के लिए भी नई सिरदर्दी बन गया है। इन चुनावों के दृष्टिगत जारी मतदाता सूची में सहजधारी सिख शामिल नहीं किए गए हैं।
हाईकोर्ट ने 18 सितंबर के प्रस्तावित चुनाव के बाबत कुछ नहीं कहा है, लेकिन विधि विशेषज्ञों का मानना है कि नोटिफिकेशन वापस लेने के साथ ही सहजधारियों का मताधिकार बहाल हो गया है। अब गुरुद्वारा चुनाव आयोग अपने स्तर पर नए सिरे से प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय ले सकता है।
गौरतलब है कि एसजीपीसी चुनाव की पंजाब, हरियाणा, हिमाचल व चंडीगढ़ में 170 सीटें हैं। हर सीट पर औसतन चार उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। एसजीपीसी चुनाव में अब तक सिर्फ केशधारी सिखों को ही वोट डालने का अधिकार था। पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ में इस एसजीपीसी चुनाव में केशधारी सिख वोटर्स की संख्या 56 लाख थी। सहजधारी सिखों के नए वोट बनने के बाद एसजीपीसी चुनाव में वोटरों की संख्या करीब तीन गुना बढऩे की संभावना है।












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