हरियाणा में एक तिहाई महिलाएं एनीमिया की चपेट में

खान-पान में लापरवाही तथा अज्ञानता के चलते हरियाणवी महिलाओं का स्वास्थय प्रभावित हो रहा है, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रो में, जहां दूध व घी का अहम् भाग है, परंतु फिर भी दूध, दही व घी के सेवन के उपरांत में महिलाओं में खून की कमी है।
पी जी आई रोहतक की पैथोलिजकल लैब के आंकड़े दर्शाते है कि प्रतिदिन करीब चार सौ महिलाओं की खून जांच में 60 प्रतिशत से ज्यादा महिलाओ का हीमोग्लोबिन 9 ग्राम से कम है, जबकि 10 से 15 प्रतिशत तक महिलाएं ऐसी है, जिनका खून 5 ग्राम से भी कम है, जबकि चिकित्सकों के अनुसार सामान्य एक स्वस्थ महिला में 11 से 14 ग्राम हीमोग्लोबिन होना चाहिए। 5 ग्राम से कम खून वाली महिलाएं चिकित्सकों के लिए चिंता का विषय है।
ऐसी महिलाओं का हीमोग्लोबिन बढ़ाने का पहले तो चिकित्सक प्रयास व उपचार करते है, परंतु परेशानी उस समय उत्पन्न होती है, जब किसी महिला का किसी कारणवंश आप्रेशन करना पड़ता है। चिकित्सकों के अनुसार अनीमिक रोगी को बार-बार चक्कर आते है, शरीर कमजोर हो जाता है, थकान जल्दी महसूस होती है, स्वभाव चिडचिडा हो जाता है तथा चेहरे का रंग पीला हो जाता है। दूध तथा घी में आयरन नहीं होता, जबकि हरी सब्जियां व फलो में आयरन होता है, जिसका सेवन जरूरी है।












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