मीडिया और एनजीओ भी हों लोकपाल के दायरे में: सरकार

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने दैट्स हिंदी को बताया कि सरकार मीडिया को तो कुछ रियायत दे सकती है पर वह एनजीओ को बख्शने की मूड में नहीं है। वह जनलोकपाल बिल को स्टैंडिंग कमेटी में भेजे जाने के बाद उसकी कोशिश है कि वह स्टैंडिंग कमेटी में ही इस बिल के तहत मीडिया और एनजीओ को शामिल करा दे। जिससे इसके अंतर्गत होने वाले भ्रष्टाचार को रोका जा सके।
वैसे सरकार इस बार मीडिया से ज्यादा दुखी है। क्योंकि उसके सभी मंत्रियों ने अन्ना के अनशन के मुद्दे पर मीडिया को कोसने में कोई कोताही नहीं बरती है। इसलिए माना जा रहा है कि मीडिया को सबसे पहले सरकार गिरफ्त में लेने की कोशिश करेगी। इसके तहत वह मीडिया घरानों पर मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू कराने का दबाव बढ़ा सकती है।
वहीं संसद में कांग्रेस के संदीप दीक्षित, सपा के रामगोपाल यादव व भाकपा के गुरुदास दास गुप्ता ने जहां कारपोरेट घरानों व एनजीओ को भी लोकपाल की दायरे में लाने की बात कही वहीं विभिन्न दलों के कई सदस्यों ने परोक्ष रूप से बड़े औद्योगिक घरानों का उल्लेख करते हुए कहा कि 2जी स्पेक्ट्रम मामले में इनकी भूमिका सार्वजनिक हो चुकी है। भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना है तो इन पर भी नजर रखनी होगी।
खुद 15 सालों तक एनजीओ से जुड़े रहे संदीप दीक्षित ने गैर सरकारी संगठनों पर अंकुश लगाने की अपील करते हुए कहा, इन्हें बिना लगाम के छोड़ दिया गया तो यह निरंकुश हो जाएंगे। इसलिए माना जा रहा है कि सरकार एनजीओ पर नकेल कसने की कवायद की तहत सरकार उनके ग्रांट के लिए नया निय़म बना सकती है। सूत्रों का कहना है कि सरकार की कोशिश है कि इन दोनों संस्थाओं पर लगाम लगाई जाय नहीं आने वाले दिनों में यह बार बार सरकार को मजबूर करते रहेंगे।












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