भ्रष्टाचार के मुद्दे पर अपनों ने भी छोड़ा कांग्रेस का हाथ

इससे सहयोगी दलों की सेहत पर कोई असर नहीं है। संप्रग की सबसे बड़े सहयोगी तृणमूल कांग्रेस पश्चिम बंगाल में कदम दर कदम केंद्र का साथ मांगती रही, लेकिन अन्ना का अनशन शुरू होने के बाद से उसने भी कभी खुलकर सरकार के रुख का समर्थन नहीं किया। अलबत्ता, प्रधानमंत्री पर आरोप लगने के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री व तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी उनके पक्ष में जरूर बोलीं, लेकिन अन्ना मामले में सारी कवायद की जिम्मेदारी उन्होंने भी सरकार पर ही छोड़ दी।
संसद में तृणमूल कांग्रेस के सासंद सुदीप बंदोपाध्याय ने भ्रष्टाचार को रोकने के लिए लोकपाल विधेयक को स्वायत्तशासी संस्था के रूप में मान्यता होनी चाहिए। राज्यों में भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए लोकायुक्तों की नियुक्ति होनी चाहिए की भी सिफारिश कर दी। वहीं केंद्रीय कृषि मंत्री व राकांपा प्रमुख शरद पवार ने भी अन्ना मसले पर सरकारी बैठकों में उसका साथ दिया, लेकिन बाहर खुद को इस पचड़े से अलग ही रखा। संप्रग की एक और अहम सहयोगी द्रमुक भी अन्ना मामले में कभी खुलकर सरकार के समर्थन में नहीं उतरी।
उल्टे बीते दिनों अन्ना के जन लोकपाल बिल को लेकर हुई सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री को भी लोकपाल के दायरे में लाने की पैरवी कर दी। इतना ही नहीं, सरकार को बाहर से समर्थन दे रही सपा भी कभी सरकार के साथ नहीं खड़ी हुई। बसपा ने बीते दिनों अन्ना का समर्थन कर दिया था, लेकिन शुक्रवार को उसके विपरीत रुख का इजहार कर दिया। इन सबके बीच, राजद प्रमुख लालू यादव ने खुले तौर पर कई बार सरकार का समर्थन किया। पर अचानक कई मुद्दों पर वह पलट भी गए। संसद में लालू प्रसाद ने अन्ना के आंदोलन को बेवजह तवज्जो देने के लिए केन्द्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया और कहा आज जो स्थिति पैदा हुई उसके लिए आप ही लोग जिम्मेदार है। सिविल सोसायटी के लोग कौन हैं। इनका कब चुनाव हुआ।
आज अरुणा राय आ गई कल कोई और नहीं आएगा इसकी कौन गारंटी देगा। अन्ना अच्छे आदमी हैं, लेकिन उनके मुंशी मैनेजर ठीक नहीं है। उन्हें दिग्भ्रमित करता है सब। उन्होंने प्रधानमंत्री पर भी कटाक्ष किया और कहा, आपने उन्हें सैल्यूट किया। पूरे सदन ने अनशन तोड़ने की अपील की, लेकिन क्या हुआ। दबाव में नहीं आने की सलाह देते हुए लालू ने कहा कालीदास मत बनिए। संविधान के खिलाफ जाकर आज सदन में चर्चा करा ली ठीक है। आगे ऐसी गलती मत कीजिएगा। संसद की सर्वोच्चता को एक इंच भी हिलने नहीं देंगे।












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