अन्‍ना का अनशन तुड़वाने में देशमुख, भैय्यू की रही अहम भूमिका

नई दिल्ली। आखिरकार भ्रष्टाचार के मुद्दे पर अन्ना हजारे का अनशन 13वें दिन टूट गया। उन्होंने नारियल पानी और शहद के साथ सभी आरोपों को धता बताते हुए दलित लड़की के हाथ अपना अनशन तोड़ा। पर इस अनशन को तोडवाने में कई लोगों को मुख्य भूमिका रही, जिसमें केंद्र सरकार में मंत्री विलासराव देशमुख जहां संकट मोचक के रूप में उभरे वहीं भय्यू जी महाराज और मेघा पाटेकर ने इसकी अंतःकथा लिखी। हालांकि इस आंदोलन को परिणति तक पहुंचाने के लिए महाराष्ट्र से आए भय्यू जी महाराज को शरद यादव ने संसद में न जाने क्या क्या कहा पर यही लोग अनशन को मंजिल तक पहुंचाने में कामयाब रहे।

गौरतलब है कि सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना के अनशन को समाप्त करने के लिए सरकार ने हालांकि संकट मोचक के रूप में प्रणब दादा को मैदान में उतारा था पर टीम अन्ना के साथ उनके अनबन के कारण उन्हें वापस हाथ पीछे खींचने पड़े। उसके बाद सरकार ने एक बार फिर दांव खेला और इस बार महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में केंद्र सरकार में मंत्री विलासराव देशमुख का सहारा लेना पड़ा जिनके ऊपर आदर्श हाउसिंग सोसायटी घोटाले के आरोपों के छींटे पड़ चुके हैं। महाराष्ट्र के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट तक का फैसला भी देशमुख के खिलाफ है। इसके अलावा हाल ही में एक अंग्रेजी पत्रिका ने मुंबई में विलासराव की सरकार के जमाने में नियमों को ताक पर रखकर बिल्डरों को दी गई जमीन के मामलों को प्रकाशित किया है।

इसे लोकतंत्र का तकाजा ही कहा जाएगा कि पिछले मंत्रिमंडल फेरबदल में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जिन भ्रष्टाचार के आरोपी विलासराव देशमुख को सिर्फ इसलिए बाहर का रास्ता दिखाने का दबाव बनाया था कि उनके खिलाफ अनेक शिकायतें मिल रही थीं, लेकिन दस जनपथ के कुछ वफादार नेताओं की ताकत ने विलासराव की कुर्सी तो बचा ली, लेकिन उन्हें बेहद हल्के महकमे विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भेज दिया गया। अब वही विलासराव प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सबसे बड़े संकटमोचक बनकर उभरे हैं। सूत्रों के मुताबिक ऐसा करके देशमुख ने पार्टी और सरकार दोनों में अपने नंबर बढ़ा लिए हैं। हालाकि कांग्रेस में कई लोगों का शुरू से ही कहना था कि अन्ना को अगर मनाना है तो देशमुख को लगाना होगा, लेकिन मनमोहन सिंह ने शुरू में इस ओर ध्यान नहीं दिया। देशमुख ने तब मोर्चा संभाला जब दस जनपथ के सलाहकारों ने उन्हें आगे किया। यह भी दिलचस्प है कि अपने आंदोलन से पूरे देश में ज्वार पैदा करने वाले अन्ना भी एक मराठी मानुष देशमुख से ही माने।

वहीं अनशन से सरकार को राहत दिलाने में मेधा पाटकर और आध्यात्मिक गुरु भय्यू जी महाराज ने भी कम भूमिका नहीं निभायी। प्रणब मुखर्जी और सलमान खुर्शीद से अरविंद केजरीवाल, किरण बेदी तथा प्रशांत भूषण की वार्ता टूटने के बाद अन्ना से अनुमति से लेकर मेधा पाटकर ने इस नए अध्याय की शुरुआत की थी। पिछले रविवार को इंदौर से दिल्ली आए भय्यू जी की रामलीला मैदान में अन्ना हजारे से दो बार एकांत में हुई मुलाकात के बाद समन्वय बनाने के दूसरे उपायों में लग गए थे। सरकार भी लगातार उनका सहयोग ले रही थी इसी दौरान मेधा पाटेकर प्रयासों ने रंग लाना शुरू कर दिया।

अन्ना के अनशन समाप्त होने की ठोस उम्मीद बंधने के बाद भय्यू जी महाराज ने कहा कि यह हम सबके लिए एक अच्छी खबर है। अन्ना एक समाज विज्ञानी है और उनका जीवन राष्ट्र के लिए महत्वपूर्ण है। भय्यू जी ने कहा कि वह देश में अच्छे वातावरण के निर्माण के लिए हमेशा तत्पर रहेंगे और उन्हें खुशी है कि केन्द्र सरकार तथा अन्ना ने उन्हें बराबर की अहमियत दी। जानकार बताते हैं कि भय्यू जी को दोबारा सरकार और अन्ना के बीच में लाने वाली मेधा ही रही और मेधा पाटकर ने ही अंतिम पटकथा की अंतिम परिणति बनी। हालांकि भय्यू जी महाराज की संसद में खूब खिल्ली शरद यादव ने उड़ाई।

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