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अन्ना आंदोलन : 16 अगस्त 2011 से 28 अगस्त 2011

नई दिल्ली। अन्ना की आंधी में पूरा देश बह चला, अन्ना के सत्य की मशाल केवल दिल्ली में ही नहीं जली बल्कि उसकी लौ पूरे भारत में जलती हुई दिखायी दे रही है। लेकिन अन्ना की जीत की राह बिल्कुल भी आसान नहीं थी। पिछले 12 दिनों में हुए घटना क्रम ने ये साबित कर दिया कि सत्य की राह आसान नहीं है।

इसके लिए बहुत पापड़ बेलना पड़ता है। आईये आपको बताते हैं कि अन्ना हजारे का अनशन जो कि 16 अगस्त से प्रारंभ हुआ था और 28 अगस्त तक चला है ने किस तरह पूरी संसद को हिलाकर रख दिया और संसद को ये बात कहने पर मजबूर कर दिया कि लोकतंत्र से बड़ा जनतंत्र है।


16 अगस्त 2011:
अन्ना हजारे ने दिल्ली पुलिस के खिलाफ आंदोलन करने का ऐलान किया क्योंकि दिल्ली पुलिस ने उन्हें उनके आंदोलन के लिए जेपी पार्क आवंटित नहीं किया गया था। लेकिन अन्ना को पुलिस ने सुबह 7:30 बजे ही दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। जिसके विरोध में अन्ना के समर्थकों ने हजारों की संख्या में अपनी गिरफ्तारी दी।

लेकिन शाम तक पुलिस ने अन्ना को गिरफ्तार घोषित करके मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जहां से अन्ना को तिहाड़ जेल भेज दिया गया। लेकिन लोगों की हाय-तौबा और चिल्लाने के बाद अन्ना को शाम को हैरत अंगेज ढंग से रीलिजिंग बेल कर दे दी गयी जिसे अन्ना ने लेने से इंकार कर दिया और अन्ना ने कहा वो जब तक तिहाड़ से बाहर नहीं आयेगें जब तक पुलिस उन्हें अनशन की इजाजत नहीं देती है। अन्ना का अनशन शुरू हो चुका था।

17 अगस्त 2011 : अन्ना के समर्थन में उतरी बीजेपी। अन्ना ने पुलिस से लिखित आश्वासन मांगा लेकिन पुलिस राजी नहीं हुई। अन्ना ने कहा कि वो तिहाड़ जेल से बाहर नहीं आयेगें। जेल के बाहर हजारों की संख्या में लोग एकत्र हो गये। पूरे देश में हुए आंदोलन, सरकार की किरकरी लेकिन अन्ना अड़े रहे। अन्ना से मिलने पहुंचे काफी लोग जैसे मेधा पाटकर, श्री श्री रविशंकर और बाबा रामदेव लेकिन अन्ना जिद पर अड़े रहे।

18 अगस्त 2011 : गुरुवार को केंद्र सरकार आखिरकार अन्‍ना के सामने झुक गई और 15 दिन के अनशन की मंजूरी दे दी और साथ में रामलीला मैदान देने पर मान गई। लेकिन रामलीला मैदान पूरी तरह तैयार ना हो पाने के कारण अन्ना तिहाड़ जेल में ही रहे।

19 अगस्त 2011 : अन्‍ना अपने हजारों समर्थकों के साथ पहले राजघाट और फिर उसके बाद रामलीला मैदान पहुँचे और सरकार के खिलाफ शंखनाद फूंख दिया। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार उनकी बात नहीं सुनती है वो रामलीला मैदान से नहीं जायेगें। 30 अगस्‍त तक सरकार लोकपाल बिल पर विचार नहीं करते हैं तो जेल भरो आंदोलन शुरू किया जाएगा।

20 अगस्त 2011 :टीम अन्‍ना ने सरकार से बीच का रास्‍ता निकालने के लिए वार्ता को तैयार है लेकिन सरकार अभी आगे नहीं बढ़ी लेकिन सरकार ने हर संभव कोशिश की ये आंदोलन थम जाये।

21 अगस्त 2011 : अन्‍ना हजारे का वजन भले ही 5 किलोग्राम कम हो गया लेकिन उनके इरादे और भी मजबूत होते गये । अन्‍ना हजारे ने सरकार से सरकारी लोकपाल बिल को ठुकराकर जनलोकपाल बिल पास करने को कहा । उन्‍होंने कहा कि अगर सरकार जनलोकपाल बिल के बारे में विचार नहीं करती तो उसे बात करने की कोई जरूरत नहीं।

22 अगस्त 2011 : अन्ना की हाल खराब होती जा रही थी जिसके दवाब के चलते सरकार ने सर्वदलीय बैठक शुरू की । बैठक में जन लोकपाल बिल पर चर्चा जारी हुई।

23 अगस्त 2011 :अन्‍ना का अनशन तुड़वाने की सरकार की कोशिशें तेज हुई । अन्ना टीम से मिली सरकार। अन्ना टीम लेकिन खफा-खफा नजर आयी। पीएम ने कहा कि जनलोकपाल बिल को स्टैंडिग कमेटी भेजेगें लेकिन अन्ना टीम राजी नहीं हुई।

24 अगस्त 2011 : संसद में लंबी बहस हुई। लेकिन कई उतार-चढ़ाव हुए। अन्ना टीम ने कहा कि सरकार ने धोखा किया। इसलिए अब पीएम आवास घेरो।


25 अगस्त 2011 : अन्ना टीम के बयान से सरकार की हालत काफी खराब हो गयी. उसने फैसला किया को जनलोकपाल पर संसद में बहस होगी। पूरी संसद ने अन्ना के आंदोलन की तारीफ की और अन्ना से अनशन तोड़ने की इल्तजा की लेकिन अन्ना अड़े रहे।

26 अगस्त 2011 : अन्ना मुद्दे पर कांग्रेस महासचिन ने बयान दिया जिसके बाद काफी हल्ला मच गया। लोगों में गुस्सा देखा गया। सरकार ने कहा कि जनलोकपाव मुद्दे पर भाजपा राजी नहीम। जिसके बाद अन्ना टीम ने भाजपा से बात की और कहा कि सरकार गुमराह कर रही है इसलिए सरकार संसद में वोटिंग कराये।

27 अगस्त 2011 : कांग्रेस और भाजपा ने अन्ना की तीनों शर्तों पर बहस करवाई और भाजपा ने साथ दे दिया जिसके बाद स्पीकर के कहने पर प्रस्ताव पारित कर दिया गया जिसे अब स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजा गया है।

28 अगस्त 2011 : अन्ना ने सुबह सवा दस बजे अनशन तोड़ दिया लेकिन उन्होंने कहा कि ये अनशन टूटा है ना कि आंदोलन। जब तक उनका जनलोकपाल बिल बन नहीं जाता वो पूरे भारत में भ्रमण करेगें।

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