अन्ना ने 28 अगस्त 2011 को अमर कर दिया
जीं हां साथियो..यही सच है 8 अगस्त 1942 में महात्मा गांधी ने अंग्रेजो भारत छोड़ो आंदोलन प्रारंभ किया था जो कि भारत को तुरन्त आजाद करने के लिये अंग्रेजी शासन के विरुद्ध एक नागरिक अवज्ञा आन्दोलन था। 15 अगस्त 1947 को भारत ने पहली बार आजादी की सांस ली थी और भारतमाता को गुलामी की जंजीरो से आजाद करवाया था।
और एक बार फिर से 28 अगस्त 2011 को भ्रष्टाचार में जकड़ा भारत आजादी की दूसरी लड़ाई का गवाह बना। हालांकि अभी ये जंग पूरी नहीं हुई है लेकिन फिर भी इसे लोग कभी भूला नहीं पायेगें। जिसका पूरा श्रेय जाता है अन्ना हजारे जी को। अन्ना हजारे ने सत्य और अंहिसा के दम पर ये जता दिया कि अगर इंसान चाह ले तो कुछ भी हो सकता है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ चला अन्ना का आंदोलन ने देश के उन युवाओं के अंदर देश के प्रति प्रेम की अलख जता दी है। आज युवाओं को एक दिशा मिल गयी है जिसे शायद वो भूल चुके थे। क्योंकि आज का युवा गांधी और जयप्रकाश को केवल किताबों में पढ़ा करता है लेकिन अन्ना के सत्याग्रह ने उसे अहिंसा और सत्य की लड़ाई का जीता जागता सबूत दिया है।
अब बात रामलीला मैदान की करते हैं, पहली बार लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने यहीं से इंदिरा गांधी के खिलाफ अपना विरोध का बिगुल फूंका था और इंदिरा गांधी को सत्ता गंवानी पड़ी थी। ये वो ही रामलीला मैदान है जहां देश के पूरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने जय जवान जय किसान का नारा दिया था। ये वो ही रामलीला मैदान है जहां पर इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान से युद्ध जीतने के बाद अपनी पहली रैली की थी।
ये वो ही रामलीला मैदान है जहां अयोध्या मु्द्दे पर भाजपा ने अपना शंखनाद किया था और ये वो ही रामलीला मैदान है जहां बाबा रामदेव ने काले धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ अपना अनशन जारी किया था लेकिन उनके अनशन पर दिल्ली पुलिस ने लाठियां बरसा कर उन्हें वहां से हरिद्वार भेज दिया था।













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