अन्‍ना हजारे ने कहा- मैंने अनशन तोड़ा नहीं स्‍थगित किया

नई दिल्‍ली। दिल्‍ली के रामलीला मैदान में अन्‍ना हजारे ने अपना अनशन तोड़ दिया, यह कहकर कि देश की जनता की यह आधी जीत है, लड़ाई अभी जारी रहेगी। इसके साथ पूरे देश में जश्‍न शुरू हो गया। इस ऐतिहासिक घड़ी में अनशन से ठीक पहले मैदान में मौजूद लोगों ने एक शपथ ली- कि वो जिंदगी में ना तो रिश्‍वत लेंगे और न देंगे। अन्‍ना ने कहा कि केवल लोकपाल बिल से भ्रष्‍टाचार नहीं मिटेगा, भ्रष्‍टाचार मिटेगा परिवर्तन से। देश में बड़े परिवर्तन की जरूरत है।

अन्‍ना ने कहा कि सरकार एक बात कान खोल कर सुन ले मैंने यह अनशन तोड़ा नहीं है, अनशन स्‍थगित किया है। वैसे तो इस बात की उम्‍मीद कम है, लेकिन अगर सरकार ने कुछ गड़बड़ की तो मैं फिर से अनशन पर बैठ जाउंगा। (क्लिक करें और पढ़ें अन्‍ना का भाषण)

अनशन से ठीक पहले अरविंद केजरीवाल ने कहा- आज पूरा देश त्‍योहार मना रहा है। सबसे पहले हम शुक्रगुजार हैं, अपने प्रधानमंत्री के। जिन्‍होंने अन्‍ना की मांगें मानी। हम अपने सांसदों और पूरी संसद के शुक्रगुजार हैं। पूरादेश में लोग एक मत थे, जिसे देखते हुए पूरे दिन की संसद बुलाई गई। और दिन भर के सत्र में लोकपाल बिल पर सहमति बनी। हम शुक्रगुजार हैं राजनीतिक पार्टियों की जिन्‍होंने अपनी सहमति दी।

हम शुक्रगुजार हैं आपके, जो कड़कती धूप, उमस और बारिश के बीच भी यहां रामलीला मैदान में खड़े रहे। हमारे देश के एनआरआई, दूसरे देशों में रहने वाले भारतीयों ने बढ़चढ़कर हिस्‍सा लिया और दुनिया के कोने-कोने में रैलियां निकलीं। हम उनके शुक्रगुजार हैं। हम उनके शुक्रगुजार हैं, जो देश के कोने-कोने से यहां पहुंचे। लेकिन इन सबके पीछे इस आंदोलन की रीढ़ की हड्डी हैं हमारे वॉलेंटियर्स। उधर से पब्लिक की इधर से हमारी गालियां खाते थे, लेकिन ये रात दिन डटे रहे।

रात को कई बार मैं यहां सोता था, तो देर रात उठता था तो ये सीढि़यों पर बैठे होते थे, वो कहते थे कि हम उनकी रक्षा कर रहे हैं। अन्‍ना के गांव रालेगांव सिद्धि से आये हैं।

उनके शुक्रवार हैं। रोहतक की जयहिंद टीम ने जिस तरह से सबकी गालियां खाते हुए भी। हम अस्मिता की टीम ने दिल्‍ली में नुक्‍कड़ नाटक किये। हम अरविंद गौड़ और उनकी टीम के शुक्रगुजार हैं। हम उन डॉक्‍टरों के शुक्रगुजार हैं, हम वेदांता सिटी के, डा त्रेहान और उनकी टीम के शुक्रगुजार हैं।

पीछे कई लोग पीछे अन्‍ना की रसाई में लोगों को मुफ्त में लोगों को भोजन कराने वाले लोगों के शुक्रगुजार हैं। यह सब इसलिए हो पाया, क्‍योंकि ढेर सारे लोगों ने दान दिया।

ये सब आंदोलन आप लोगों के चंदे पर चला। हम दानदाताओं के शुक्र गुजार हैं। ये सारी मीडिया के शुक्रगुजार हैं। इन लोगों ने सिर्फ नौकरी नहीं की, ये हमारे इस आंदोलन का हिस्‍सा बने। हम मीडिया को नमन करते हैं।

इस आंदोलन में बाहर से बड़ी-बड़ी हस्तियां आयीं और हमें समय दिया। जब हमें रामलीला मैदान मिला था, तब यह की‍चड़ से भरा था। हम एमसीडी और वहां के कमिश्‍नर व दिल्‍ली की मेयर और नगर निगम के कर्मचारियों के शुक्रगुजार हैं। दिल्‍ली जल बोर्ड के शुक्रगुजार हैं, जिन्‍होंने हमें पानी पिलाया। दिल्‍ली पुलिस के हम शुक्रगुजार हैं। हम उन पुलिसवालों के शुक्रगुजार हैं, जो हमें पकड़ कर तिहाड़ ले गये थे। उनमें से कुछ लोग ड्यूटी पूरी कर वर्दी उतार कर हमारे आंदोलन में शामिल होने आये थे। हम उन अधिकारियों के शुक्रगुजार हैं, जिन्‍होंने हमारा साथ दिया।

तिहाड़ जेल के शुक्रगुजार हैं, अन्‍ना की सेवा करने के लिए। सबसे जोरदार तालियां नितिन और उनकी टीम के लिए जिन्‍होंने पूरे दिन हमें बापू के भजन सुनाये। पब्लिक कॉर्ड रिसर्च फाउंडेशन जो इस आंदोलन की सेक्रेटेरियेट के रूप में काम कर रही है। सबसे ज्‍यादा शुक्रगुजार हैं, पूज्‍य श्रीश्री रविशंकर जी के। उन्‍होंने हमें आशीर्वाद दिया और हमारे साथ समय बिताया। आपको नमन। हम आर्ट आफ लिविंग के कार्यकर्ताओं के शुक्र गुजार हैं जिन्‍होंने रात दिन मेहनत की। हम उन सभी के शुक्रगुजार हैं, जो इस आंदोलन का हिस्‍सा बने। हम उन अनशनकारियों के शुक्रगुजार हैं, जिन्‍होंने देश भर में अन्‍ना जी के साथ अनशन किया।

साथियों इस पूरे आंदोलन ने भारतीय जनतंत्र को लेकर कुछ अहम सवाल किये हैं। हम पांच साल में एक बार अपना एमपी, एमएलए चुनकर सदन में भेजते हैं। इस उम्‍मीद के साथ कि ये एमपी और एमएलए जनता से पूछें कि आप किस तरह का कानून चाहते हैं। धीरे-धीरे ऐसी व्‍यवस्‍था बन गई कि सांसद की भी चलना बंद हो गई। वो भी असहाय हैं। किस तरह का कानून बनाया जाये, इसमें जनता और सांसदों की जगह पार्टी हाई कमान की चलती है।

हम संसद की बहुत इज्‍जत करते हैं, लेकिन मन में कुछ प्रश्‍न उठते हैं। 1947 में देश आजाद हुआ और उसके बाद बीआर अम्‍बेडकर के नेतृत्‍व में संविधान बना, जिसमें सबसे ऊपर देश के नागरिकों को रखा गया है। संसद को बनाने वाले देश के लोग हैं। जो बनाने वाला होता है, वो सबसे बड़ा होता है। संसद की हम बहुत इज्‍जत करते हैं, लेकिन उससे ऊपर देश की जनता है।

आज तक देश में बनने वाले कानून में जनता की राय नहीं होती थी, इस बार पहली बार ऐसा कानून आया, जिसमें पूरे देश की जनता की भागीदारी रही। हम संसद को नमन करते हैं। लेकिन हम चाहते हैं, कि यह सिलसिला जारी रहे। संसद के अंदर वही कानून बनाये जायें, जैसा कि जनता चाहती है। क्‍या हर कानून के पहले ऐसा आंदोलन करना पड़ेगा। हम ऐसी व्‍यवस्‍था चाहते हैं कि कानून बनाने के पहले जनता से पूछा जाये।

साथियों हमारे हर गांव के अंदर पंचायत है, ग्राम सभा है। हर सांसद कानून बनाने से पहले अपने-अपने ग्राम सभा की मीटिंग ले और वहां से उनकी राय ली जाये। शहरों में मोहल्‍ला सभाएं हों, जिनके साथ सांसद मीटिंग करे और फिर संसद में बोलने के लिए तैयार हो कि हम कानून के पक्ष में बोलें या विपक्ष में। कुछ लोगों का कहना है कि हम संविधान के खिलाफ हैं। यह गलत अफवाह है। हम संविधान और बाबा साहब अम्‍बेडकर को सलाम करते हैं। उन्‍होंने देश का संविधान बनाया है। लेकिन उन्‍होंने कभी ऐसा नहीं सोचा होगा कि एक दिन ऐसा आयेगा कि जो अंग्रेज यहां का पैसा लंदन ले जाते हैं और देश में ऐसा समय आयेगा जब यहां के लोग जनता को चूस कर स्विस बैंक में पैसा भर देंगे।

हम नेताओं के खिलाफ नहीं हैं। हमने कभी ऐसा नहीं कहा कि सब नेता चोर हैं। सब नेता गलत नहीं हैं, अच्‍छे नेता भी हैं, गलत नेता भी हैं। आने वाले समय में साथियों राइट टू रिकॉल, राइट टू रिजेक्‍ट, जुडीशियल रिफॉर्म। अन्‍ना जी अब अपना अनशन तोड़ेंगे और उसके तुरंत बाद वो यहां से अस्‍पताल जायेंगे। आज शाम को छह बजे इंडिया गेट के पास ज्‍यादा से ज्‍यादा लोग पहुंचें और इस जनतंत्र का जश्‍न मनायें। भ्रष्‍टाचार से मुक्ति सिर्फ कानून से नहीं होगी। हमें शपथ लेनी होगी। मैं शपथ लेता हूं कि मैं अपनी जिंदगी में न कभी रिश्‍वत दूंगा और न कभी रिश्‍वत लूंगा।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+