बिल पेश करना है तो अपनी सरकार बनाएं अन्ना: मायावती

मायावती ने एनडीए और यूपीए पर निशाना साधते हुए कहा कि अन्ना हजारे के अनशन की आढ़ में दोनों पार्टियां बिल्ली चूहे का खेल जारी रखे हुए हैं जिसे बंद किया जाना चाहिए। उन्होंने गृहमंत्रालय को भी यह अपील की कि अन्ना हजारे का अनशन तुड़वाने के लिए वह कोई सख्त कदम उठाए। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि अगर उत्तर प्रदेश में कोई अन्ना हजारे का समर्थन के बहाने कानून अपने हाथ में लेता है तो उसपर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अन्ना समर्थकों द्वारा पुलिस की पिटाई किए जाने का भी हवाला किया।
मायावती ने कहा कि अन्ना हजारे की 3 शर्तों को भी नामंजूर किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और न्यायपालिका को आम सहमति के बाद ही लोकपाल के दायरे में रखना चाहिए। तीसरी शर्त के बारे में मायावती ने कहा कि हमारे राज्य में सिटीजन चार्टर पहले से ही लागू है। मायावती ने निचले स्तर के अधिकारियों को भी लोकपाल से बाहर रखने की भी बात की। उन्होंने कहा कि अगर उच्च स्तर के अधिकारी अगर लोकपाल के दायरे में आ जांएगे तो भ्रष्टाचार अपने आप ही मिट जाएंगे।
राज्यों में लोकायुक्त के चुनाव के मुद्दे पर मायावती ने कहा कि संविधान के अनुसार यह अधिकार राज्य सरकारों का है। अगर राज्य सरकार चाहेगी तभी लोकायुक्त को चुना जा सकता है। केंद्र को इस मामले में दखल नहीं देना चाहिए। मायावती के आज के बयान से इतना तो साफ हो गया कि उन्होंने अन्ना हजोर के जनलोकपाल बिल को पूरी तरह से नकार दिया है। अब वे खुलकर अन्ना हजारे के जनलोकपाल बिल के खिलाफ आ खड़ी हुई हैं।












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