अन्ना के अनशन से दूर कहां हैं बाबा रामदेव?
बाबा पर चर्चा से पहले अगर हम बुधवार की घटना पर नजर डालें तो बाबा रामदेव अपने सैंकड़ों समर्थकों के साथ उस दिन तिहाड़ जेल पहुंचे थे। उस वक्त यहां तक खबर आयी थी कि बाबा भी अन्ना के साथ अनशन पर बैठेंगे। बाबा के आने से जनलोकपाल बिल को लेकर लोगों की उम्मीदें कई गुना बढ़ गई थीं। लोगों को लगा कि अन्ना की आग को अगर रामदेव की हवा मिल गई, तो क्रांति आ जाएगी। हालांकि क्रांति तो उनके नहीं रहने पर भी आ चुकी है, फिर भी यहां बाबा की सही लोकेशन पर सवाल तो बनता ही है।
बाबा के करीबियों की मानें तो वो बुधवार को ही हरिद्वार के लिए रवाना हो गये थे। वो बुधवार को दिल्ली सिर्फ राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से मिलने आये थे। तब से वो हरिद्वार में ही अपनी योग कक्षाएं ले रहे हैं।
अब सवाल यह उठता है कि इतनी ऊर्जा के साथ आंदोलन में शामिल हुए बाबा आखिर चले क्यों गये? क्या टीम अन्ना के साथ उनकी पुरानी दुश्मनी उभर आयी या फिर वो अपनी राजनीति का उल्ली अकेले सीधा करना चाहते हैं।? कहीं बाबा किसी दूसरे अनशन की तैयारी में तो नहीं? इन सवालों के बीच जो कयास लगाये जा रहे हैं, वो भी काफी रोचक हैं।
सही मायने में देखा जाये तो बाबा ने अपने कदम पीछे हटाकर खुद के लिए और अपनी आने वाली पार्टी के लिए अच्छा नहीं किया। यह बात पक्की है कि अगर बाबा इस समय रामलीला मैदान में होते तो उन्हें भी राजनीति चमकाने का भरपूर मौका मिलता। लेकिन ऐसा नहीं हुआ, क्योंकि रामदेव अपने अलग आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। जी हां बाबा के एक करीबी ने बताया कि बाबा रामदेव काला धन के मामले को दबने नहीं देंगे। वो उसके लिए एक बार फिर आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। संभवत: अगले ही महीने उनका आंदोलन शुरू हो जाये।













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