कहानी में टि्वस्ट, सामने आया तीसरा लोकपाल बिल
अरूणा रॉय की टीम ने भी एक लोकपाल बिल तैयार किया है जिसमें पीएम के दायरे में आने की बात तो है लेकिन उनका ड्राफ्ट न्यायपालिका को समर्थन नहीं करता है। इसके साथ ही वो हर राज्य में एक लोकायुक्त रखने की बात भी करती है। जबकि अन्ना के जनलोकपाल बिल में पीएम और न्यायपालिका दोनों को दायरे में आने की बात कही गयी है जबकि सरकारी बिल पीएम का विरोध कर रहा है। अरूणा ने कहा है कि पीएम लोकपाल में होना चाहिए लेकिन उसकी कुछ शर्ते भी होनी चाहिए। अरूणा के बिल में अहम योगदान हर्षमानदार का भी है जो कि पूर्व आईएस थे।
अरूणा रॉय ने लोकतंत्र नेताओं के लिए नहीं हैं बल्कि जनता के लिए। अरूणा की टीम कहती है कि वो स्टैडिंग कमेटी के पास अपना ड्राफ्ट ले कर जायेगी। उसे तीनों ही ड्राफ्ट को मिलाकर एक नया ड्राफ्ट बना देना चाहिए ताकि जो भी कानून बनें वो स्पष्ट और सही हो। अरूणा रॉय ने कहा है कि उन्होंने आरटीआई एक्ट के दौरान स्टैडिंग कमेटी में बहुत सारे परिवर्तन कराये थे, इसलिए लोकपाल बिल के समय भी परिवर्तन संभव है।
सोचने वाली बात ये है कि अचानक तीसरा लोकपाल सामने कैसे आ गया वो भी जब अन्ना का आंदोलन इस कदर आगे बढ़ चुका है जिसने सरकार के माथे पर पसीना ला दिया है। हमारे दिल्ली संवाददाता राजेश राय ने बताया हो सकता है कि य़े कोई राजनैतिक चाल हो सकती है जिसकी वजह से अन्ना के जनलोकपाल बिल को रोका जा सके।क्योंकि अरूणा रॉय इंडियन काउंसिल की मेंबर यानी की सोनिया के बेहद करीब है। इस मौके पर जब पूरी तरह सरकार घिर चुकी है उस समय अरूणा रॉय का ड्रॉप्ट सिर्फ और सिर्फ ये साबित करता है कि ये पूरा प्रयास केवल अन्ना के आंदोलन और जनलोकपाल बिल को रोकने के लिए किया जा रहा है क्योंकि अन्ना के आंदोलन से इस समय लगभग पूरा देश जुड़ रहा है। जो कि सरकार के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।













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