अन्ना के खिलाफ 'वक्त बिताओ, थकाओ और भगाओ' की रणनीति बना रही है सरकार
सूत्रों की मानें तो सरकार अन्ना समर्थकों को थकाने का काम कर रही है। सरकार को इस बात का इल्म है कि अन्ना 74 साल के हो चुके हैं और वह 2 या 3 दिन से ज्यादा अनशन नहीं कर सकते। मालूम हो कि सरकार ने अन्ना को 15 दिनों के लिये अनशन का इजाजत दी है। सरकार की योजना के मुताबिक चार-पांच दिन में अन्ना की गिरती हेल्थ के आधार पर उन्हें अस्पताल में भर्ती करा दिया जाएगा। अस्पताल में अन्ना समर्थक भीड़ नहीं कर सकते।
रामलीला मैदान में मौजूद लोगों का जोश भी अन्ना की गैरमौजूदगी में ठंडा पड़ता जाएगा। मीडिया भी इस मुद्दे की कवरेज से बोर होकर कोई नया मुद्दा ढूंढ लेगा। सड़कों पर जनसैलाब तो पहले से ही कुछ कम दिख रहा है। सरकार ये भी रणनीति बना रही है कि यदि विपक्ष का कोई सांसद जनलोकपाल बिल को संसद में रखता है तो संसद उसपर निर्णय ले सकती है।
गौरतलब है कि बीजेपी नेता वरुण गांधी ने जनलोकपाल बिल को निजी तौर पर संसद में रखने का ऐलान किया है। हालांकि अन्ना हजारे के समर्थकों के जोश को देखकर ऐसा नहीं लगता कि सरकार की ये रणनीति कामयाब होगी। अन्ना हजारे के समर्थकों का जोश कम नहीं हो रहा है। इसका नमूना तो अन्ना के बाहर आते ही दिख गया कि उनके समर्थकों में कितना जोश है। ऐसे में सरकार को इस पारी में भी अन्ना से मुंह की खानी पड़ेगी।













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