अन्ना के अनशन ने लगाया गांधी टोपी को पंख

आंदोलन में शामिल बच्चों से लेकर बुजुर्गो के सिर पर यह टोपियां देखी जा रही हैं। महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और मध्य भारत के दुकानदारों के का कहना है कि गांधी टोपियां चुनावों और मराठी समुदाय में होने वाली शादियों के मौसम में रफ्तार पकड़ती है। मगर इस बार अन्ना के प्रभाव के चलते टोपियों की मांग खासी बढ़ गई है। इन दिनों अन्ना समर्थक खास तौर पर युवा वर्ग जमकर गांधी टोपी खरीद रहा है। वे उन गांधी टोपियों की मांग कर रहे हैं, जिन पर मैं हूं अन्ना और आई एम अन्ना जैसे नारे लिखे हों।
इन टोपियों की कीमत बाजार में पांच से दस रुपये के बीच है। राजनीतिक इतिहास के जानकारों के मुताबिक भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौर में गांधी टोपी एक तरह से कांग्रेस की ठेठ पहचान से जुड़ गई थी, लेकिन आजादी मिलने के बाद देश के प्रमुख सियासी दल के भीतर इसका चलन लगातार कम होता चला गया। देश की आजादी के 64 साल बाद गांधी टोपी फिर राष्ट्रीय भावना का प्रतीक बन गई है।












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