भ्रष्टाचार के आरोप में मंत्री पद से हटाये गये अवधपाल सिंह

UP minister resigns after Lokayukta recommends his removal
लखनऊ। लोकायुक्त की गाज आखिरकार प्रदेश के पशुधन मंत्री पर गिर ही गयी और उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। लोकायुक्त ने भ्रष्टाचार एवं वित्तीय अनियमितताओं को लेकर मंत्री अवधपाल सिंह को पद से हटाने की मुख्यमंत्री से सिफारिश की थी। पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री अवधपाल सिंह यादव ने अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री मायावती को सौंप दिया। लोकायुक्त की जांच के बाद श्री यादव मायावती सरकार के दूसरे मंत्री हैं जिन्हें अपना पद छोडऩा पड़ा है। इससे पहले धर्मार्थ कार्य राज्य मंत्री राजेश त्रिपाठी को इस्तीफा देना पड़ा था।

मुख्यमंत्री को इस्तीफा सौंपने के बाद अवधपाल ने इसे राजनीतिक साजिश बताया और कहा कि वह इसके खिलाफ वह संघर्ष करेंगे। मंगलवार को लोकायुक्त एन.के.मेहरोत्रा ने मंत्री को हटाने के लिये पूरे सबूत मुख्यमंत्री मायावती के सामने पेश किये थे। श्री मेहरोत्रा ने 36 पेज की सिफारिश में चौदह ऐसे मामले उठाये जिसमें मंत्री का हाथ साफ नजर आता है। इसमें एटा में गैरकानूनी शराब की भट्टी चलाने का भी है, जिसमें प्रतिदिन दस हजार लीटर शराब बनती है और उनके परिवार के सदस्यों द्वारा बिकवायी जाती है।

एटा में पिछले 10 जून को तीन लोगों की हत्या में भी मंत्री और उनके परिवार के सदस्यों का नाम आया था लेकिन राज्य सरकार ने इस मामले में उन्हें क्लीन चिट दे दी थी। लोकायुक्त ने सुश्री मायावती को मंत्री को पद से हटाने और उनके खिलाफ उनके गृह जिले एटा में आपराधिक मामला चलाने की कल सिफारिश की थी। श्री मेेहरोत्रा ने कहा कि मंत्री से 11 आरोपों के जवाब मांगे गये थे लेकिन उन्होंनें किसी का भी जवाब दाखिल नहीं किया और न ही किसी भी आरोप से इनकार किया। मंत्री की ओर से तय सीमा में जवाब नहीं मिलने के बाद ही मुख्यमंत्री से उन्हें पद से हटाने और आपराधिक मामला चलाने की सिफारिश की गयी।

मुख्यमंत्री से यह भी आग्रह किया गया कि मंत्री के गृह जिले एटा के जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के तबादले किये जायें क्योंकि सभी मंत्री और उनके परिवार वालों के हितों के लिये काम करते हैं। लोकायुक्त की जांच में यह पाया गया कि मंत्री अवधपाल सिंह यादव और उनके परिवार के सदस्यों ने सरकारी जमीन पर कब्जा किया और उसकी रजिस्ट्री अपने नाम करा ली। राजस्व विभाग के कर्मचारियों ने इसकी सूचना जिलाधिकारी को दी लेकिन उनकी ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई।

यह बात भी सामने आयी है कि ब्लाक प्रमुख के चुनाव में श्री यादव ने दवाब डालकर अपने एक निकट के सहयोगी को चुनाव जितवाया और पांच फर्जी मतदान कराये। इसके अलावा मंत्री अपनी पूरी विधायक निधि का 95 प्रतिशत हिस्सा केवल स्कूल प्रबन्धकों को निर्माण के लिये दिया था और प्रबन्धकों से पचास से साठ प्रतिशत तक कमीशन लिया।

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