सीसीआई ने डीएलएफ पर लगाया 630 करोड़ रूपए का जुर्माना

DLF
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने डीएलएफ के उपर प्रभावशाली स्थिती के दुरपयोग करने पर 630 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। भारत की सबसे बड़ी रियल स्‍टेट कंपनी डीएलएफ लिमिटेड पर यह जुर्माना अपने दबदबे का दुरूपयोग करने पर लगाया गया है। अगर देखा लाए तो यह जुर्माना कंपनी के सालाना कारोबार 9,006.27 करोड़ रुपये का 7 फीसदी है।

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने यह जुर्मान गुड़गांव में 2 महंगी आवासीय परियोजनाओं के ग्राहकों द्वारा प्रभावशाली स्थिती का दुरूपयोग और अपार्टमेंट एलाटमेंट पर भेदभाव को लेकर किया गया है। डीएलएफ की प्रोजेक्ट में फ्लैट बुक कराने वाले कुछ लोगों की शिकायत पर पिछले साल मई में आयोग ने जांच सौंपी थी। जिन लोगों को समय पर फ्लैट देने का वादा किया गया था उन‍कों समय पर फ्लैट नहीं मिल पाए है।

सीसीआई ने डीएलएफ को गुडग़ांव के खरीददारों से होने वाले समझौतों में गलत शर्तों को शामिल नहीं करने का आदेश दिया। आयोग ने कंपनी को 3 महीनों के भीतर इन शर्तों जल्‍द सुधार करने के लिए भी कहा है। जिन परियोजनाएं की वजह से यह जुर्माना किया गया है वह अगस्त 2006 में शुरू की गई थीं और इन्हें 3 साल में पूरा किया जाना था, लेकिन कंपनी ने बाद में समयसीमा में इजाफा कर दिया।

गुडग़ांव की इन दोनों परियोजनाओं में कुल 2,200 फ्लैट होने का अनुमान है, जिनमें प्रत्येक की कीमत 1.5 से 3 करोड़ रुपये है। दोनों परियोजनाओं को मिला कर कुल मूल्यांकन 4,500 से 5,000 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। सीसीआई के इस फैसले से अन्य रियल एस्टेट कंपनियों पर भी इसका असर पड़ेगा क्योंकि डीएलएफ द्वारा समझौते में लगाई गईं शर्तें इस पूरे क्षेत्र में सभी जानते हैं। अगर कंपनी चाहे तो उसके पास सीसीआई के फैसले को न्यायाधिकरण में चुनौती देने का भी विकल्प भी मौजूद है।

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