अपमान बर्दाश्‍त नहीं कर पा रहे यूपी के नेता

Uttar Pradesh Assembly
लखनऊ। नेतागिरी को सम्मान पाने का जरिया मानने वाले नेता अब दुखी हो रहे हैं। विधान सभा अध्यक्ष के सामने यूपी के कई नेताओं ने कहा कि कई जगहों पर उनका अपमान किया जा रहा है जिसे वह स्वीकार नहीं कर सकते। उनका कहना है कि जनप्रतिनिधि होने के नाते उन्हें सम्मान मिलना चाहिए।

विधानसभा शून्य काल में कांग्रेस विधानमण्डल दल के नेता प्रमोद तिवारी ने नेताओं अपमान का मुद्दा उठाते हुए कहा कि विधायिका के अधिकारों का क्षरण हो रहा है। उन्होंने कहा विधायक अपमानित किये जा रहे हैं। उन्होंने इसे चिन्ता का विषय बताते हुए कहा कि यदि ऐसे ही चलता रहा तो एक दिन वह आयेगा कि विधायिका के दरवाजे पर कार्यपालिका ताला लगा देगी।

उन्होंने प्रोटोकाल के उल्लघंन को उठाते हुए कहा कि प्रोटोकाल में प्रमुख सचिव से ऊपर होने के बावजूद विधायकों को अधिकारी समुचित सम्मान नहीं दे रहे हैं। अधिकारी विधायकों को गिनते नहीं हैं। यहां तक की विधायकों को अधिकारियों से मिलने के लिए प्रतीक्षा करना पड़ती है। यहां तक की फोन पर भी सही जवाब नहीं मिलता है।

विधायकों ने मांग की कि इस मामले में दलगत राजनीति से ऊपर उठकर स मान दिलाने की दिशा में सरकार को पहल करनी चाहिए। पक्ष-विपक्ष ने इस मामले में एकजुट होते हुए माना कि विधायिका कमजोर होने पर लोकतंत्र खतरे में पड़ जायेगा।

मामले को गंभीरता से लेते हुए संसदीय कार्य मंत्री लालजी वर्मा ने कहा कि शिष्टाचार और प्रोटोकाल बनाये रखने के लिए शासन स्तर से कडे निर्देश जारी किये गये हैं। सपा के माता प्रसाद पाण्डेय ने विशेषाधिकार समिति के विधिवत गठन का मामला औचित्य के सवाल पर उठाया।

पाण्डेय का कहना था कि विधानसभा उपाध्यक्ष ही विशेषाधिकार समिति का पदेन अध्यक्ष होता है। जब उपाध्यक्ष का चुनाव नहीं हुआ है तो विशेषाधिकार समिति का कोई औचित्य नहीं है। समिति के विधिवत गठन नहीं होने से विधायिका अपना अधिकार धीरे-धीरे न्यायपालिका को देती जा रही है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+