उत्तर प्रदेश : अब बैंक में जमा होगा कैदियों का पारिश्रमिक

वर्तमान समय में प्रदेश की 63 जेलों में 80 हजार से अधिक कैदी बंद हैं जिसमें 24 हजार के करीब सजायाफ्ता हैं। सजायाफ्ता कैदियों को जेल में परिश्रम के बदले पारिश्रमिक दिया जाता है। अभी तक कैदियों को मिलने वाला पारिश्रमिक कारागार अधीक्षक के खाते में जमा होता था तथा जब भी कैदी जेल से छूटने वाला होता था वह रकमउसे दे दी जाती थी। अब ऐसा नहीं होगा जेलों में सजा काट रहे कैदियों का अलग खाता खोला जाएगा। जेल अधिकारियों का कहना है कि सरकार इस निर्णय से कैदियों को इस बात की संतुष्टिi रहेगी कि उनका धन सुरक्षित है तथा उस पर मिलने वाला ब्याज उनके ही काम आएगा।
अधिकारियों का कहना है कि लम्बे समय से यह मांग हो रही थी कि कैदियों का खाता क्योंकि कारागार अधीक्षक के खाते में पैसा जमा होने पर ब्याज का लाभ सरकार के खाते में चला जाता है ऐसा नहीं होना चाहिए। कैदियों की मांग थी कि उनकी कमाई पर मिलने वाले ब्याज पर सिर्फ उनका ही हक है अत: उनका अलग खाता खोला जाए। अलग खाता खुलने से इस बात की आसानी हो गयी कि कैदी अपने परिजनों को रकम दे भी सकते हैं ताकि उनके आश्रित उसका प्रयोग कर सकें।
दूसरी ओर योजना का एक पक्ष यह भी है कि जेल प्रशासन को कैदियों के बहीखाते बनाने से निजात मिल जाएगी। जेल अधिकारियों का कहना है कि इसके लिए बैंक प्रशासन से बात चल रही है कुछ बैकों ने कैदियों के खाते खोलने से इनकार कर दिया जबकि कुछ इसके लिए राजी हैं। योजना के प्रथम चरण में अलीगढ़ व मेरठ के जेलों में बंद कैदियों के खाते खोल दिए गए हैं। जबकि प्रदेश के अन्य जिलों में यह प्रक्रिया जल्द ही पूरी हो जाएगी। ज्ञात हो कि जेलों में बंद कैदियों कैदियों से फर्नीचर बनवाने से लेकर कृषि कराने तक कार्य लिया जाता जिसके लिए मिलने वाला पारिश्रमिक तीन श्रेणी में तय होता है। कुशल श्रमिक की तरह कार्य करने वालों को प्रतिदिन 40 रुपये, अर्धकुशल को 30 रुपये जबकि अकुशल को दिन के 20 रुपये पारिश्रमिक मिलता है।












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