फर्जी मार्कशीट से पायलट बनने वाला गिरफ्तार

उन्होंने बताया था कि गौरव जैन और गुड़गांव निवासी अभिषेक कौशिक फर्जी मार्कशीट देकर कामर्शियल पायलट लाइसेंस लिया है। गौरव में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के इंदौर बेंच से अग्रिम जमानत की गुहार लगाई थी। इस कोर्ट से उसे दो माह की जमानत दे दी थी। इसके बाद गौरव ने दिल्ली के साकेत के सेशन कोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी दी थी। जिसे अदालत ने खारिज कर दी। इसके बाद पुलिस ने गौरव को गिरफ्तार कर लिया। गौरव ने बताया कि वर्ष 2007 में इंदौर से 12वीं पास करने के बाद अगले वर्ष कनाडा चला गया। जहां स्काई क्वेस्ट एविएशन लिमिटेड फ्लाइंग स्कूल ज्वाइन किया। इसके बाद कनाडा में कामर्शियल पायलट लाइसेंस लेने के बाद वर्ष 2009 में वापस आ गया।
भारत पर डीजीसीए की ओर से पायलट लाइसेंस के लिए होने वाली परीक्षा में बैठा। वर्ष 2009-10 में वह फेल हो गया। इसी दौरान एक दोस्त के माध्यम से उसकी मुलाकात मनोज ढाका से हुई। मनोज के पास कामर्शियल पायलट लाइसेंस था। मनोज ने बताया कि अगर वह उसे तीस हजार रुपये देगा तो उसे लाइसेंस मिल सकता है। रुपये देने के बाद उसने एक मार्कशीट दी। जिसमें उसे पास दिखाया गया था। जिसे उसने अप्रैल 2010 में डीजीसीए को दे दिया। गौरव को जून 2010 में कामर्शियल पायलट का लाइसेंस मिल गया। इससे पहले पकड़े गए पायलट रोहित कपूर ने भी मनोज को 50 हजार देने की बात कही थी। पुलिस के मुताबिक अब तक करीब 13 पायलट, चार दलाल और तीन डीजीसीए अधिकारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस अब भी पांच फर्जी पायलट की तलाश कर रही है।












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