अफजल के जीवन का काउंटडाउन शुरू

एक सूत्र ने बताया कि अफजल गुरु के मामले में केंद्र ने अपनी ऊहापोह खत्म कर दी है। इस संबंध में गृह मंत्रालय ने सरकार की राय से राष्ट्रपति को अवगत करवा दिया है। इस बारे में संसद में पूछे गए एक सवाल के जवाब में गृह राज्य मंत्री मुल्लापल्ली रामचंद्रन ने भी कहा कि मंत्रालय ने गुरु की फाइल 27 जुलाई को राष्ट्रपति भवन को सौंप दी है। अब इस बारे में उन्हें फैसला करना है। माना जा रहा है कि अब एक बार सरकार की ओर से फैसला ले लिए जाने के बाद राष्ट्रपति भी गुरु की दया याचिका को ठुकराने का फैसला कर सकती हैं।
कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता राशिद अल्वी ने इस बारे में पूछे जाने पर कहा कि यह मामला राष्ट्रपति के विचाराधीन है। इसलिए इस पर पार्टी की ओर से कुछ भी कहना ठीक नहीं होगा। हालांकि उन्होंने सरकार के फैसले की ओर संकेत करते हुए इतना जरूर कहा कि जो भी फैसला सरकार ने किया है वह एक व्यवस्था के तहत किया गया है।
2001 में संसद पर हुए हमले के मामले में गुरु की फांसी की सजा को 2004 में ही सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया दिया था। इसके बाद उसने राष्ट्रपति के पास दया याचिका दी थी। इस पर फैसले से पहले राष्ट्रपति भवन गृह मंत्रालय के जरिए संबंधित राज्य सरकार की राय भी लेता है।
आपको बता दें कि अफजल गुरु को फांसी दिए जाने की मांग भाजपा काफी समय से करती आ रही है और उसका आरोप है कि कांग्रेस इस पूरे मामले पर सियासत कर रही है। भाजपा का मानना है कि आंतकवाद को कुचलने के लिए सरकार को कुछ कठोर निर्णय करने होंगे जिससे आतंकियों के पास संदेश जाए कि जो भी इस कृत्य में शामिल होगा उसे बख्शा नहीं जाएगा।












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