हिंदू-मुस्लिम की नफरत में सुलग रहा है मुराबाद, 6 जगहों पर कर्फ्यू

Uttar Pradesh: Communal tension in Moradabad, curfew imposed in some areas
मुरादाबाद। उत्‍तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में रविवार को कावरियों के रास्‍ते को लेकर हुए बलवे की आग अब ठंडी हो चली थी। जिदंगी भी सामान्‍य रूप से पटरी पर लौटने लगी थी। अधिकारियों और आम जनता ने मिलकर रविवार की उस काली रात के निशां भी लगभग मिटा ही दिये थे कि मंगलवार की रात अचानक फिर मुरादाबाद का दस सराय इलाका इस कदर गरमा गया कि यहां से शुरु हुआ आगजनी, पथराव व फायरिंग का खेल पलभर में आधे शहर में फैल गया। शहर के कई जगहों से सड़कों पर निकली उग्र भीड़ में न केवल आमने सामने का संघर्ष हुआ बल्कि कई जगह तो भीड़ ने पुलिस से सीधा मोर्चा ले लिया। इस खूनी संघर्ष के दौरान सीओ, कोतवाल सहित लगभग डेढ़ दर्जन लोग घायल हो गये।

हालत को बेकाबू देखकर शहर के आधा दर्जन इलाकों में कर्फ्यू घोषित कर दिया गया। हुआ कुछ यूं कि मंगलवार की सुबह सर्वदलीय हिंदू संगठन की दस सराय के शिव मंदिर पर हो रही बैठक से निकली भीड़ में कुछ युवकों ने बेकाबू होकर एकाएक पथराव कर कुछ वाहनों में तोड़फोड़ की तो रात का अंधेरा होते ही दोनों पक्ष आमने सामने आ गये। रात करीब दस बजे दस सराय इलाके से उत्तेजित तेवरों के साथ युवकों का एक गुट सड़कों पर निकला और करूला-करबला इलाके के एक धार्मिक परिसर पर पथराव शुरू कर दिया।

इसके कुछ देर बाद ईदगाह रोड पर एकाएक उत्तेजित हुए लोगों ने बाइक समेत कुछ दुकानों में आग लगा दी। इसमें एक धर्मस्थल को क्षति पहुंचाए जाने की बात भी कही जा रही है। देखते ही देखते कई इलाकों में भी भीड़ का हुजूम सड़कों पर निकल आया और दोनों ओर से पथराव के साथ शुरू हुए संघर्ष में कई जगह आगजनी व फायरिंग की गई। इन स्थितियों के बीच करीब आधा शहर हिंसा की लपटों में घिरा नजर आया। प्राप्‍त जानकारी के अनुसार जिले के आधा दर्जन इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया गया है।

दिन में जो थे इंसान, रात को बन गये हिंदू और मुसलमान

सात संदूकों में भरकर दफ्न कर दो नफरतें आज इंसां को मोहब्बत की जरूरत है बहुत। मशहूर शायर बशीर बद्र की यह दो लाइनें मुरादाबाद के मौजूदा स्थित पर बिल्‍कुल माकूल है। आखिर में क्या हो गया अदब के इस शहर को। सुबह की दुआ-सलाम और नमस्ते करके हालचाल जानने वाले शाम को एक-दूसरे की जान की दुश्मन नजर आए। ऐसा क्यों कर रहे हैं? इसका जवाब को बलवा करने वालों को खुद पता नहीं था। बस सुनी-सुनाई बातों पर हो गए उत्तेजित।

उजाले में इंसान दिखाई देने वाले रात गहराते ही हिंदू और मुसलमान बनकर निकल आए सड़कों पर नंगा नाच करने के लिए। फायरिंग तो ऐसे हुई जैसे बच्चे पटाखे छोड़ रहे हों। आगजनी का शिकार बने गरीब, गरीबों की रिक्शाएं, दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करने के लिए लगाए फड़, खोखे असमाजिक तत्वों ने फूंक दिए। ऐसा नहीं कि, धर्म की आड़ में हमलावर भीड को समझाने वाले नहीं थे। दरअसल हुआ यह था कि बवाल पर अमादा भीड़ ने बुजुर्गो और शांतिप्रिय लोगों की हिदायत, अपील, नसीहत को अनसुना कर दिया था।

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