सावन विशेष : ये जो तेरे पायलों की छम-छम है...
दोस्तों, हम लगातार आपको महिलाओं के सोलह श्रृंगार के बारे में बता रहे हैं । जानी मानी पत्रिका 'एराउंड द इंडिया' के मई अंक में छपे लेख सोलह 'श्रृंगार की महत्ता' की लेखिका 'कुमद मेहरोत्रा' ने इस विषय पर गहन अध्ययन किया है, जिसके बाद उन्होंने अपनी लेखनी से श्रृंगार का महत्व समझाया है।
कल हमने आपको श्रृंगार नंबर 13 यानी कमरबंद के बारे में तो आज हम आपको बताते हैं श्रृंगार नंबर 14 यानी पाजेब के बारे में। जिसे हम पायल भी कहते हैं। दुल्हन अपने घर की गृहलक्ष्मी होती है। उसका संचारण और सुभागमन बहुत शुभ माना जाता है। पायल मूल रूप से चांदी की होती है। चांदी चंद्रमा की धातु है, चंद्रमा शरीर में मन का कारक होता है। पाजेब में बजने वाले घुंघरू मन को भटकने से रोकते हैं।
और पूरे परिवार को शांति औऱ घूंघरू की तरह एक में पिरोकर रखने की शक्ति देते हैं। इसलिए पायलों की छम-छम को बहुत सुंदर माना जाता है।













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