यूपी: भड़क गये भोले भक्‍त, दंगा, आगजनी व पथराव के बाद कर्फ्यू

Uttar Pradesh
लखनऊ। उत्‍तर प्रदेश का अति संवेदनशील जनपद मुरादाबाद रविवार की रात आचानक आग में जल उठा। हर तरफ चीख और जान बचाने की जद्दो जहद थी। कई लोग घरों को अंदर से बंद कर छत पर छिपे हुए थे। सड़कों पर धूं-धूं कर जल रहे दर्जनों वाहन उस बवाल की कहानी कह रह थे जिसने चंद समय में शहर को शमशान बना दिया था। बात सिर्फ इतनी सी थी कि शहर के रहमतनगर की एक गली में कांवरियों को घुसने से मना किया गया था और कांवरिये उग्र हो गये थे।

उसके बाद दोनों ओर से एकाएक पथराव शुरू होने पर अफरा-तफरी मच गई, जबकि इस बीच की गई आगजनी में कई वाहन जल कर राख हो गए, जिनमें कुछ वाहन कांवरियों के जत्थे से जुड़े थे। मौके पर फोर्स को तैनात कर दिया गया है। प्राप्‍त जानकारी के अनुसार दससराय में कांवरियों का जत्था पहुंचने पर शाम को एक रास्ते पर जाने और न जाने की बहस से माहौल गर्माया तो एकाएक पुलिस व प्रशासनिक अफसर सक्रिय हो गए। एक पक्ष इसे नई परंपरा बताकर विरोध कर रहा था तो कांवरियों का तर्क था इस रास्ते को पहले से इस्तेमाल कर रहे हैं।

इस बीच कांवरिया जत्थों के साथ तेज आवाज में लाउड स्पीकर चलाने पर भी दूसरे पक्ष ने आपत्ति की। अफसरों ने दोनों पक्षों को समझाकर हालात काबू किए लेकिन एकाएक रात करीब 10 बजे कांवरियों द्वारा फिर उसी रास्ते से जाने की कोशिश की तो दोनों पक्षों के आमने सामने आने से पथराव शुरू हो गया। देखते-देखते दोनों ओर की भीड़ बढ़ी और कई जगह आगजनी कर दी गई। इनमें कांवरिया जत्थे के कुछ वाहनों समेत ट्रक और बाइक आग की भेंट चढ़ गए। सूत्रों ने बताया कि आगजनी में कई दुकानों के काउंटर, एक मैटाडोर, एक ट्रक, आठ बाइक आग के हवाले कर दी गईं।

बवाल के बाद पंख लगाकर उड़ीं सैकड़ों अफवाहें

दस सराय इलाके में बवाली हालात से जहां एक तरफ पुलिस प्रशासन जूझ रहा था, वहीं पूरे शहर में तरह-तरह की अफवाहें फैलने के साथ संवेदनशीलता बढ़ने लगी। नतीजे में दस सराय जुलाई गई महानगर भर की पुलिस फोर्स व अफसरों को अलग-अलग इलाकों में सक्रिय किया गया। देर रात तक पुलिस सब कुछ सामान्य होने की स्थिति का जगह-जगह घूमकर भरोसा दिलाती रही।

अफवाहों का आलम यह था कि अचानक एक इंस्पेक्टर के दस सराय बवाल में गोली से घायल हो जाने की चर्चा तेजी से फैली। दावे करने वालों ने घायल इंस्पेक्टर के अस्पताल में भर्ती होने तक तकी बात फैला दी। यही नहीं बवाल की चपेट में आकर कई सामान्य लोगों के भी गोली से घायल होने की बात फैली। इन चर्चाओं के साथ पुराने शहर में जगह-जगह लोग सड़कों पर निकल आए और चौराहों पर जमा होकर कयासबाजियों में उलझे रहे।

इन हालात को काबू करने के लिए पुलिस को जगह-जगह घूम कर लोगों को भरोसा दिलाना पड़ा। घायल बताए गए इंस्पेक्टर को भी खुद को सही बताने के लिए शहर में राउंड भी लेना पड़ा। महानगर के विभिन्न इलाकों के साथ-साथ दससराय इलाके में देर रात फिर भीड़ के सड़कों पर निकल आने और दोनों ओर से लोगों के जुटने की चर्चा फैली। पुलिस ने फिर गश्त बढ़ाई और बाहर निकलते लोगों को सख्ती के साथ वापस किया।

फिर हुई खुफिया सूचनाओं की अनदेखी

खुफिया सूचनाओं को नजरअंदाज करना एक बार फिर पुलिस के लिए मुसीबत बन गया है। यदि इन सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई की जाती तो दस सराय क्षेत्र में हालात नहीं बिगड़ते। दससराय क्षेत्र में स्थिति विस्फोटक होने की खुफिया सूचनाएं थीं। इसी को लेकर खुफिया विभाग ने उच्चाधिकारियों को इसकी सूचना दे दी गई थी। इसमें सलाह दी गई थी कि सम्भल की ओर बढ़ने वाले शिवसैनिकों के जत्थे को दस सराय क्षेत्र तक न पहुंचने देने की बात भी कही गई थी। सूत्रों के अनुसार पिछले दिनों कांवड़ को लेकर हुई बैठक में इस खुफिया रिपोर्ट को लेकर चर्चा भी हुई थी, लेकिन इसे हवा में उड़ा दिया गया।

इलाके में सुनने को अब सिर्फ पुलिसिया सायरन

दस सराय क्षेत्र में जहां भारी चहल-पहल थी, वहां बवाल होने के बाद अब रात के सन्नाटे को पुलिसिया सायरन ही चीर रहे हैं। दस सराय क्षेत्र को पूरी तरह छावनी में तब्दील कर दिया गया है। पुलिस कर्मियों के साथ ही अधिकारी भी चप्पे-चप्पे पर निगाह रख रहे हैं।

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