संसद में बिना ऑफिस सैकड़ों सांसद

Office less MPs in Parliament
नई दिल्ली। तमाम विरोध प्रदर्शन के बाद रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी को तो संसद भवन में बड़ा कमरा मिल गया है, लेकिन उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस की बड़े कमरे की चाहत पूरी होती नहीं दिख रही। संसद में 22 सांसदों वाली तृणमूल को तीसरी मंजिल में कमरा मिला है जबकि 15वीं लोकसभा गठित होने के बाद उन्हें भूतल में तेलगुदेशम पार्टी (टीडीपी) के कब्जे वाला कमरा आवंटित किया गया था। दूसरी तरफ संसद में मात्र पांच सांसदों तक सिमट चुकी लालू प्रसाद यादव की राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) आज भी तीसरी मंजिल पर दो कमरों वाले कार्यालय पर जमी है। वैसे, नियमों के तहत आरजेडी अब संसद भवन में कमरा मिलने का अधिकार खो चुकी है।

इसी तरह डीएमके आज भी बड़े कमरे के लिए प्रयासरत है। मौजूदा लोकसभा के गठन के बाद स्पीकर कार्यालय ने मान्यता प्राप्त दलों को कार्यालय के लिए संसद भवन में कमरा देने के लिए नया मापदंड बनाया। इसके तहत जिन दलों के न्यूनतम सात सांसद थे, उन्हें ही कमरा देना तय किया गया। आरजेडी के तब लोकसभा में चार और राज्यसभा में तीन सांसद थे। इससे उन्हें छोटा कमरा मिलना था। 14वीं लोकसभा के दौरान आरजेडी को मिला कमरा बसपा को दिया जाना था।

इसी तरह डीएमके को भूतल में टीडीपी वाला कमरा मिलना था। इस फैसले पर अब तक अमल नहीं हो पाया है। दरअसल इन दलों ने अपने कब्जे वाले कमरे खाली करने से तभी इनकार कर दिया। मामला स्पीकर मीरा कुमार तक भी पहुंचा। इन दलों के नेताओं ने स्पीकर से दोटूक कहा कि उनकी बजाए अफसरों को मिले बड़े कमरे खाली कराए जाने चाहिए। इसके बाद मामला आगे नहीं बढ़ पाया। इधर, संसद में लगभग दो दर्जन ऐसे दल हैं जिनके एक से लेकर छह सांसद हैं, लेकिन उनके लिए संसद में बैठने का इंतजाम नहीं हो पाया है। इन दलों के सांसदों का 'कार्यालय" केंद्रीय कक्ष ही है।

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