हादसे के बाद झगड़ रहे लोगों को कैंटर ने कुचला

पुलिस के मुताबिक ,तड़के करीब पौने चार बजे मायापुरी फ्लाईओवर पर वैगन आर कार को एक ट्रक ने पीछे से टक्कर मार दी। इससे ट्रक आगे चल रहे ऑटो से टकरा गया। कार चला रहे मंगलापुरी निवासी पवन कुमार ट्रक चालक मंजीत और हेल्पर संजीत से कहासुनी करने लगा। इस दौरान ऑटो चालक सुबोध भी वहां पहुंच कर उनसे कहासुनी करने लगा। ऑटो और कार चालक ने कुछ परिचितों को भी वहां बुला लिया लेकिन सुलह न होते देख पवन ने घटना की जानकारी पुलिस को दे दी। मौके पर पहुंचे पीसीआर कर्मी मामले की जांच कर ही रहे थे कि तेज रफ्तार से आ रहे कैंटर ने वहां मौजूद ग्यारह लोगों को कुचल दिया जिसमें दो पीसीआर कर्मी भी शामिल थे।
सभी को दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां पीसीआर के हवलदार देशराज (50), सिपाही पवन कुमार (21), वैगनआर चालक पवन कुमार (25) और उसके मामा विजय कुमार (45) को मृत घोषित कर दिया गया। घटना में ट्रक चालक, हेल्पर मंजीत और संजीत के अलावा नरेश कुमार, सूरज, विनोद, ऑटो चालक सुबोध और करण जख्मी हो गया। घटना को अंजाम देने के बाद कैंटर चालक वेरू सिंह फरार हो गया। पुलिस ने उसके खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने से हुई मौत का मामला दर्ज किया है।
जब पवन के वैगन आर में ट्रक ने पीछे से टक्कर मारी तो उसने महसूस किया होगा कि वह हादसे में बाल बाल बच गया। लेकिन कुछ देर बाद ही कैंटर के कुचलने से उसकी मौत हो गई। पुलिस का कहना है कि पवन कॉल सेंटर में कार चलाता है। रात में धौला कुआं आने के दौरान मायापुरी फ्लाई ओवर पर एक ट्रक ने उसे पीछे से टक्कर मार दी। इससे कार अनियंत्रित होकर आगे चल रहे आटो से टकरा गई। ऑटो चालक सुबोध कार चालक को दोषी बताने लगा। जबकि पवन इसका दोष ट्रक चालक को दे रहा था। पवन ने भाई को बुलाकर कार में बैठे सवारी को गंतव्य तक पहुंचा दिया। लेकिन उसका मामा विजय भी वहीं रुक गया। पवन की बात को जब ट्रक चालक नहीं मान रहे थे तो उसने पीसीआर को फोन कर दिया।
पीसीआर कर्मी भी वहां पहुंचकर कार्रवाई करने लगे। इस दौरान यह हादसा हुआ और घटनास्थल की तस्वीर ही बदल गई। पवन और विजय कैंटर के चपेट में पहले आए इसलिए उनकी मौके पर ही मौत हो गई। दोनों मंगलापुरी के रहने वाले हैं। जबकि मूलत: हिमाचल निवासी हवलदार देशराज का पैर कट गया। जयपुर निवासी सिपाही पवन कैंटर के नीचे कुचल गया।
ऑटो चालक सुबोध के जख्मी होने की सूचना मिलते ही उसके परिचित करीब सौ से ज्यादा ऑटो चालक सुबह से ही दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल पहुंचने लगे। सभी उसकी मदद करने के लिए तैयार थे। चालक नवीन ने बताया कि रात में दिल्ली की सड़कों पर ऑटो चलाने में डर लगता है। वाहन जिस रफ्तार और लाल बत्ती को अनदेखी करते हैं कि अगर लोग सावधानी से वाहन न चलाए तो कभी भी भयंकर हादसा हो सकता है। वहीं, सुरेश ने बताया कि इस हादसे के वक्त चूंकि पीसीआर की लाइट भी जल रही थी। ऐसे में कैंटर चालक कैसे अपने वाहन की गति को रोक नहीं पाया। यह काफी चौंकाने वाली बात लग रही है।












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