आजम खां व अखिलेश के सामने शिवपाल का कद घटा

आजम खां की पार्टी में वापसी तथा प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव से उनकी नजदीकी ने शिवपाल के कद को काफी घटा दिया है। टिकटों के बटवारे से लेकर अहम मुददों पर निर्णय में शिवपाल की भागेदारी कम हो गयी है। जबकि राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव इन सभी बातों से खुद को अलग बताते हैं।
बसपा के विधायक भगवान शर्मा उर्फ गुड्डू पण्डित, भाजपा के राजेन्द्र सिंह, यशपाल सिंह चौहान व गोमती यादव तथा पूर्व विधायक किशन लाल बघेल ने सपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। पार्टी में शामिल होते ही इन लोगों को उम्मीदवार घोषित कर दिया गया है। पार्टी नेतृत्व के ऐसा किए जाने के बाद पुराने कार्यकर्ताओं व वरिष्ठ सदस्यों ने अपना विरोध दर्ज कराया। बात जब मुलायम सिंह तक पहुंची तो उन्होंने खुद को टिकटों के बटवारे से अलग कर लिया। नाराज कार्यकर्ताओं ने शिवपाल सिंह यादव से भी मामले की शिकायत दर्ज करायी लेकिन वहां से भी कोई माकूल जवाब नहीं मिला।
सूत्रों की माने तो शिवपाल सिंह यादव ने टिकटों के बंटवारें पर कहा कि यह कार्य अखिलेश यादव देख रहे हैं अत: वह कुछ नहीं कर सकते। पार्टी के वरिष्ठ नेता मुलायम सिंह के भाई शिवपाल का यह बयान कार्यकर्ताओं को निराश करने जैसा था इसकी प्रतिक्रिया सड़कों पर दिखायी देने लगी। कार्यकर्ताओं ने कई इलाकों में मुलायम सिंह यादव का पुतला फूंका व मुलायम विरोधी नारेबाजी की।
पार्टी सूत्रों के आने के बाद से ही पार्टी में फूट पड़ गयी है। मंच पर तो अखिलेश व शिवपाल साथ देते जाते हैं लेकिन पार्टी में अखिलेश ने जिस प्रकार कब्जा जमाया है उससे शिवपाल हाशिए पर पहुंच गए हैं। अखिलेश को आगे बढ़ाने तथा चाचा से दूरने में मुलायम के पुराने दोस्त आजम खां की मुख्य भूमिका है। कहा जा रहा है कि एक समय पार्टी में अमर सिंह की जो हैसियत हुआ करती थी आजम उसी कद को पाने में जुटे हैं।
पर्दे के पीछे से आजम खां पार्टी को संचालित कर रहे हैं तथा अखिलेश आजम की हर बात को स्वीकार रहे हैं इसी का परिणाम है कि शिवपाल सिंह धीरे-धीरे पार्टी से कटते जा रहे हैं। उधर अखिलेश को आगे करने के पीछे मुलायम व अन्य वरिष्ठi नेता यह कह रहे हैं कि यह दौर युवाओं का दौर है अत: अखिलेश को सीएम के पद का दावेदार बताकर वोट लिया जा सकता है।












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