दिल्ली : ट्रैवल एजेंसी मालिक को चंबल से छुड़ाया

बसंत ने साथियों के साथ मिलकर 30 जुलाई फरीद को गोकुलपुरी से धोखे से अगवा कर लिया था। आरोपियों के पास से पुलिस ने पीड़ित की लूटी गई मारुति स्वीफ्ट कार, डीएल, आरसी बरामद किया है। पुलिस तीन अन्य की तलाश कर रही है। फरीद के मुताबिक वहां हनुमान जी की एक मूर्ति मिली। उसने उसी को सीने से लगाकर सारा वक्त काट दिया।
उत्तर-पूर्वी जिला पुलिस उपायुक्त संजय कुमार जैन ने बताया कि 30 जुलाई को फरीद की मां ने अपने बेटे की गुमशुदगी की रिपोर्ट गोकुलपुरी थाने में दर्ज कराई। बाद में 20 लाख रुपये फिरौती की कॉल आने पर पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी। जांच के दौरान पता चला कि बसंत कुमार नामक शख्स ने फोन कर एक मरीज को खुर्जा, यूपी ले जाने के लिए फरीद की कार ली थी।
फरीद खुद अपनी कार लेकर गया था। इसके बाद पुलिस ने बसंत को धौलपुर राजस्थान से फरीद की कार और अन्य सामान के साथ दबोच लिया। बसंत की निशानदेही पर पुलिस ने हरी सिंह के चंबल के बीहड़ स्थित मकान से फरीद को मुक्त करा लिया। हरी सिंह अपहृत किए गए लोगों को अपने यहां रखकर फिरौती की रकम का कमीशन लेता है।
फरीद के बदले मिलने वाली रकम में उसे बीस फीसदी, दो लाख रुपये मिलते। पूछताछ में आरोपी बसंत ने बताया कि उसने अपने भाई प्रमोद, जीजा अमित और पंकज के साथ मिलकर फरीद को अगवा किया था। पुलिस को अमित, प्रमोद और पंकज की तलाश है। फरीद ने बताया कि वहां हनुमान जी की मूर्ति को सीने से लगाकर उसने सात दिन काटे।
उसे छुड़ाने जब पुलिस की टीम बीहड़ पहुंची तो फरीद रो पड़ा। उसने जिंदा वापस घर लौटने की उम्मीद छोड़ दी थी। बदमाशों ने फरीद को चंबल बीहड़ में बने एक संकरे कमरे में बंद कर दिया था। वहां इतनी जगह भी नहीं थी कि फरीद खड़ा हो सके। हरी सिंह चंबल के कुख्यात राजेंद्र गुर्जर गैंग को फरीद को बेचने की फिराक में था। फरीद ने बताया कि दिल्ली से पहले उसे आगरा, बाद में चंबल के घने जंगलों में ले जाया गया। मुश्किल से चार फुट ऊंचे कमरे में उसे बंद कर दिया गया। वहां उसे हनुमान जी की एक मूर्ति मिली। उसने उसी को सीने से लगाकर सारा वक्त काट दिया। उसे मात्र एक वक्तका खाना दिया जाता था।












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