मानसून सत्र में प्रधानमंत्री को बख्शने के मूड़ नहीं भाजपा

भाजपा सबसे ज्यादा मनमोहन सिंह के उस बयान से खफा था जिसमें रविवार को मनमोहन सिंह ने कहा था कि सरकार के पास विपक्ष को शर्मसार करने वाले कई राज हैं। लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि पीएम के बयान ने माहौल को दूषित कर दिया है। जवाब विपक्ष को नहीं प्रधानमंत्री को देने होंगे क्योंकि स्पेक्ट्रम आवंटन में उनकी भूमिका उजागर हो गई है।
वहीं भाजपा के एक अन्य नेता अरुण जेटली ने भी प्रधानमंत्री को कटघरे में खड़ा किया औऱ कहा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री ए. राजा ने प्रधानमंत्री को 9 पत्र लिखे थे और इन दोनों लोगों के बीच 18 पत्रों का आदान प्रदान हुआ था। इससे स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री स्पेक्ट्रम आवंटन के हर मामले को जानते थे। उन्होंने कहा कि राजा और चिदंबरम ने 7 अप्रैल 2007 की बैठक में कुछ विदेशी कंपनियों को अतिरिक्त इक्विटी दिए जाने को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के अनुरूप बताया था।
प्रधानमंत्री जाने माने अर्थशास्त्री हैं, लेकिन जब उनके समक्ष विदेशी साझेदार को अतिरिक्त इक्विटी आवंटन का विषय आया जो उन्हें संदेह क्यों नहीं हुआ? प्रधानमंत्री इन सवालों का उत्तर देने की बजाए विपक्ष पर हमले की रणनीति अपना रहे हैं। उन्होंने कहा, दोषी व्यक्ति अपनी शर्तें नहीं थोप सकता है, प्रधानमंत्री और चिदंबरम को सभी बातों का जवाब देना ही होगा।












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