मध्य प्रदेश: सावन का काला सोमवार, बस खाई में गिरी, 26 मरे

प्राप्त जानकारी के अनुसार सूचना पाकर बचाव दल फौरन मौके पर पहुंच गया और राहत कार्य शुरु कर दिया गया। सूत्रों की मानें तो 20 यात्रियों के शव नदी से निकाले जा चुके हैं जिसमें से 18 की शिनाख्त हो चुकी है। बस के शेष यात्री अभी लापता हैं। कई यात्री अभी भी बस में फंसे हुए हैं, जिनके जिंदा बचने की उम्मीद बहुत कम है। प्रशासन द्वारा राहत व बचाव कार्य तेजी से किए जा रहे हैं।
आपको बतातें चलें कि दोपहर साढ़े ग्यारह बजे नादरा बस स्टैण्ड भोपाल से जबलपुर रवाना हुई गायत्री बस में बैठे यात्रियों को क्या पता था कि यह उनकी अंतिम यात्रा होगी। भोपाल से चिकलौद, बाड़ी होते हुए सवा बजे जैसे ही यह बस बारना नदी के पुल पर पहुंची तो लगा कि पहले से ही मौत बड़ी बेसब्री से लोगों का इंतजार कर रही हो। पुल पर पहुंचते बस का अगला टायर फट गया और पल भर में बस असंतुलित होकर नदी में समा गई। ड्राइवर बस को संभाल पाता इससे पहले ही बस बाढ़ वाली बारना नदी में डूब गई।
बस के चालक परिचालक का भी अभी तक पता नहीं चल सका है। लोगों ने बताया कि नदी में पुल से दो-तीन फीट नीचे और करीब 18 फीट गहरा पानी बह रहा था, जिस कारण बस पानी में पूरी तरह डूब गई। बस के पुल से नीचे गिरते ही चीख पुकार शुरू हो गई, इसे देखकर प्रत्यक्षदर्शियों ने पुलिस को सूचना दी तब कहीं जाकर आधा घंटे बाद बचाव कार्य शुरू हुआ। तीन जेसीबी मशीनों से बस को खींचकर पास लाया गया। बरेली अस्पताल में करीब आधा दर्जन घायलों को भर्ती किया जा चुका है। गंभीर घायलों को भोपाल भेजा गया है।
बारना नदी ने 28 साल बाद दोहराया मौत का इतिहास
बारना नदी में बस हादसे की यह दूसरी घटना है। इससे पूर्व 5 सितंबर 1983 को पुल से अनियंत्रित होकर बरेली से भोपाल जाते समय नदी में गिरी थी, जिसमें 22 सवारियों की घटनास्थल पर ही मौत हो गयी थी। उस वक्त बस में लगभग 40 लोग सवार थे।
पुल पर यात्रियों का ही इंतजार कर रही थी मौत
बारना नदी पर हुए भीषण बस हादसे से क्षेत्र में मातम छा गया है। बस के नदी में डूबने से 40 से ज्यादा लोगों की जल समाधि हो गई। ऐसा लगा जैसे मौत पहले से ही पुल पर यात्रियों का इंतजार कर रही थी और पलक झपकते ही दर्जनों लोग काल के गाल में समा गए। दोपहर एक बजे से शाम सात बजे तक कछुआ चाल से चले राहत व बचाव कार्य के करण मौतों की संख्या बढ़ती गई। यदि प्रशासन तत्काल क्रेन से बस निकालने की कार्रवाई करता तो कई लोगों को बचाया जा सकता था। नगर में इस हृदय विदारक घटना के बाद समूचा नगर स्तब्ध रह गया। जैसे ही घटना की जानकारी मिली लोग कौतुहलवश बस बारना नदी के पुल पर पहुंच राहत एवं बचाव कार्य में जुड़ गए।












Click it and Unblock the Notifications