बेशर्मी मोर्चाः लड़कियां किसी के बाप की जागीर नहीं

Why Woman is public property?
दिल्ली। कम कपड़े पहनने का हवाला देकर छेड़खानी को जायज ठहराने वालों के खिलाफ बेशर्मी मोर्चा ने जंतर-मंतर पर स्लट वॉक किया। मौन रूप से मार्च निकालकर विरोध जताया गया लेकिन तख्तियों और पोस्टरों पर लिखे स्लोगन महिलाओं की बेबसी, विरोध और साहस को बयां कर रहे थे। स्लोगनों से युवतियों ने सीधे तौर पर समाज को कुछ सोचने पर मजबूर कर दिया। पब्लिक में औरत! पब्लिक प्रापर्टी क्यों? आदि स्लोगनों से युवतियों ने ही नहीं युवकों ने भी फैशन या कम कपड़ों की बजाय मानसिकता बदलने पर जोर दिया।

अश्लील ड्रेस पहनना छेड़खानी और यौन उत्पीड़न को बढ़ावा देना है। इस मानसिकता के खिलाफ सैकड़ों की तादाद में युवतियां सड़क पर उतरीं। स्लट वॉक में शामिल वालेंटियर और समर्थकों ने भारतीय परंपरा का ख्याल रखते हुए अश्लील परिधानों से खुद को अलग रखा। एक स्वर में सभी ने नारी का सम्मान करो, सोच बदलो, कपड़े नहीं का नारा बुलंद किया। स्लट वॉक ग्रुप का कहना है कि लोगों की मानसिकता खराब है जिससे महिलाओं का यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ का शिकार होना पड़ता है। बेशर्मी मोर्चा का नेतृत्व कर रहीं दिल्ली यूनिवर्सिटी की उमंग सब्बरवाल ने इस दौरान कहा कि यह अभियान औरतों के खिलाफ हो रही हिंसा के विरोध में है।

यह वॉक सोच बदलने की आवश्यकता को बताती है न कि कपड़े बदलने की। इसके समर्थन में जर्मनी, इंग्लैंड आदि देशों की कई महिलाएं भी पहुंची थीं। कई अभिभावक भी बच्चों के साथ स्लट वॉक में शामिल हुए। साथ ही, नुक्कड़ नाटक से महिलाओं पर हो रहे अत्याचार का ज्वलंत मंचन किया गया। वहीं, नफीसा अली ने कहा कि लोगों को मानसिकता बदलने की आवश्यकता है। जब तक सोच नहीं बदलेगी, नारी को सम्मान नहीं मिलेगा। स्लट वॉक एक जागृति है। लड़का हो या लड़की सभी को सम्मान मिलना चाहिए।

स्लट वॉक को सोशल नेटवर्किगिं ने समर्थन जुटाने में काफी मदद की। विदेशी नागरिक इस वॉक के समर्थन में फेसबुक व वेबसाइट से जुड़े और वॉक में कदमताल मिलाई। लातवियां से पहुंची जाना, जानिश जाकिश का कहना था कि सोशल नेटवर्किगिं और मीडिया के माध्यम से उन्हें इस विरोध के बारे में जानकारी मिली। कई अभिभावकों ने भी स्लट वॉक में शिरकत की। वॉक में शामिल निष्ठा ने कहा कि विरोध में शामिल होने का उद्देश्य यह है कि आने वाले दिनों में बच्चों को इस मुहिम को छेड़ने की आवश्यकता न पड़े। गुजरात की केतकी ने भी इसका समर्थन किया। उन्होंने बताया कि दिल्ली की अपेक्षा गुजरात ज्यादा सुरक्षित है। गरबा के दिनों में रात भर लड़कियां सड़क पर होती हैं। इस बात को लेकर चिंतित होने की आवश्यकता नहीं होती कि मनचले छेड़खानी करेंगे या यौन उत्पीड़न।

स्लट वॉक को लेकर लोगों में भी काफी उत्साह था। विदेशी तर्ज पर आयोजित इस वॉक को देखने के लिए कनॉट प्लेस इलाके के सैकड़ों लोग ऐसे भी पहुंचे थे जिन्हें इस वॉक से कोई लेना देना नहीं था। हालांकि, दिल्ली में युवतियों के यौन उत्पीड़न को लेकर वे इस वॉक के समर्थन में दिखे।
> जर्मनी की अना भी स्लट वॉक के समर्थन में पहुंची थीं। उनका कहना था यौन हिंसा कम कपड़ों के कारण नहीं, बल्कि सोच के कारण है। दिल्ली में यौन उत्पीड़न की घटना बराबर सुनने को मिलती है।

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