जम्मू-कश्मीर: हिरासत में युवक की मौत के बाद जबरदस्त बवाल

प्रशासन ने क्षेत्र में सख्ती से धारा 144 लागू कर दी है। इससे कफ्र्यू जैसी स्थिति बन गई है और क्षेत्र में तनाव व्याप्त है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। देर रात तक इलाके में प्रदर्शन और नारेबाजी जारी थी। इससे पहले वर्ष 2009 में श्रीनगर में आलूचाबाग इलाके के मंजूर अहमद की हिरासत में मौत हुई थी। सोपोर में वीरवार को आतंकियों ने मोहम्मद अशरफ डार नामक एक युवक को मौत के घाट उतारा था। इस मामले की जांच करते हुए पुलिस को कुछ महत्वपूर्ण सुराग मिले।
उन्हीं सुरागों के आधार पर एसओजी श्रीनगर और सोपोर के एक संयुक्त कार्यदल ने शनिवार देर शाम सोपोर के क्रांकशवन इलाके से नाजिम रसूल उर्फ अंजुम को उसकी दुकान से गिरफ्तार कर लिया। 26 वर्षीय अंजुम के बारे में पुलिस ने दावा किया है कि वह अशरफ डार को मौत के घाट उतारने वाले आतंकियों के साथ था। अलबत्ता, उसके पिता अब्दुल रशीद शाला ने दावा किया है कि अंजुम का आतंकियों से कोई नाता नहीं था। डीएसपी सोपोर आशिक हुसैन ने नाजिम उर्फ अंजुम की हिरासती मौत की पुष्टि करते हुए मौत के कारणों के खुलासे से इंकार किया है।
कश्मीर रेंज के आइजीपी ने कहा कि हम किसी से कोई बात नहीं छिपाएंगे। हम उन हालात का जायजा ले रहे हैं, जिनमें मंजूर की मौत हुई है। इस बीच, सुबह जब सोपोर में मंजूर की मौत की खबर फैली तो तनाव पैदा हो गया। दोपहर तक पुलिस ने स्थिति को संभाले रखा, लेकिन उसके बाद क्रांकशवन, आलमदार, बाबा राजा, बाग-ए-गुलशन और अल-कौंसर व उससे सटे इलाकों में बड़ी संख्या में लोग आजादी समर्थक और देश विरोधी नारेबाजी करते हुए सड़कों पर उतर आए।
पुलिस ने जब लोगों को प्रदर्शन से मना करते हुए वापस घरों को लौटने के लिए कहा तो वह धक्का-मुक्की करते हुए पथराव करने लगे। भीड़ को हिंसक होते देख पुलिसकर्मियों ने भी लाठियों और आंसूगैस का सहारा लिया। देर शाम तक जारी हिंसक झड़प में छह लोग तनवीर नवीद, फारूक अहमद, अब्दुल मजीद शाला, जहूर अहमद, इम्तियाज अहमद और सन्नाउल्लाह जख्मी हो गए।












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