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पिछले 3 महीने से निवेशकों को बर्गला रहा स्‍पीक एशिया

मुंबई/लखनऊ। देश के 12 लाख लोगों से 1320 करोड़ रुपए ऐठ चुकी सर्वे कंपनी स्‍पीक एशिया पिछले तीन महीने से निवेशकों को बरगलाती रही। पिछले साल भारत के कई छोटे-बड़े शहरों में अपना नेटवर्क बिछाकर लोगों को बिना मेहनत जल्‍दी अमीर बनने का सपना दिखाने वाली इस कंपनी के सीईओ के फरार होने और सीओओ समेत कई शीर्ष अधिकारियों के पुलिस हिरासत में जाने के बाद निवेशकों को अब समझ में आने लगा है कि उनका पैसा डूब गया है।

यहां हम आपको बतायेंगे कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा कंपनी के सभी खाते फ्रीज़ किये जाने के बाद भी कंपनी किस तरह निवेशकों को अपने संग जोड़ती रही और उन्‍हें पैसा वापस देने की मीठी-मीठी बातें कर बरगलाती रही।

स्‍पीक एशिया ने शुरू में निवेशकों से 11 हजार रुपए लिये और हर हफ्ते सर्वे के नाम पर सभी निवेशकों को समय पर पैसा देती रही। 11 हजार लगाने के बाद हर महीने चार हजार रुपए आते देख लोगों को पहले विश्‍वास नहीं हुआ, लेकिन जब वे खुद सदस्‍य बने, तब यह नेटवर्क तेजी से पूरे देश में फैल गया। दिसंबर से लेकर मई यानी छह महीने में लखनऊ, कानपुर, रायपुर, भोपाल, इंदौर, जबलपुर, गाजियाबाद, बैंगलोर और पटना समेत कई बड़े शहरों में स्‍पीक एशिया का बुखार तेजी से चढ़ गया। यह वो समय था जब कंपनी के खाते में 1320 करोड़ रुपए जमा हो गये।

अचानक जब मई में रिजर्व बैंक ने खाते फ्रीज किये और भारत सरकार ने कंपनी के पंजीकरण पर सवाल उठाये, तब स्‍पीक एशिया ने सभी को पेसा बंद कर दिया। यानी जिन्‍होंने फरवरी के बाद से पैसा लगाया, उनका पैसा फंस गया। मीडिया में तमाम खबरें आने के बाद भी लोगों की जेब से पैसा निकालने का सिलसिला स्‍पीक एशिया ने जारी रखा।

कंपनी लगातार टेलीविजन, अखबार और इंटरनेट पर विज्ञापन देती रही। निवेशकों को मोबाइल पर लगातार एसएमस करती रही कि उनका पैसा जरूर वापस मिलेगा। अपनी वेबसाइट पर रोज नये संदेश' हमारी कंपनी का जल्‍द पंजीकरण हो जायेगा, आप घबरायें मत, आपका पैसा मिलेगा.... लिखकर निवेशकों को बरगलाती रही।

मीटिंग के नाम पर कमाये लाखों

जून के बाद से स्‍पीक एशिया से जुड़ने वालों की संख्‍या ना के बराबर हो गई। तब कंपनी ने एक नया हथकंडा अपनाते हुए लाखों रुपए अंदर कर लिये। यह हथकंडा लखनऊ, इंदौर, कानपुर, गाजियाबाद, जबलपुर, भोपाल समेत करीब 15 शहरों में हुई स्‍पीक एशिया की मीटिंगें। इस मीटिंग में कंपनी ने निवेशकों को न्‍योता दिया और टिकट की कीमत 150 से 300 रुपए तक रखी। जाहिर है, जिसका हजारों, लाखों रुपए फंसा होगा, वो 300 रुपए तो जरूर खर्चेगा। प्रत्‍येक मीटिंग में पांच से दस हजार लोग आये, यानी कंपनी ने मीटिंग के नाम पर 50 लाख से ज्‍यादा रुपए सीधे किये।

लखनऊ के निवेशक इंद्रेश कुमार का कहना है कि अब तो कंपनी ने एसएमएस करना भी बंद कर दिया है। अब कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर मोबाइल, टीवी, फ्रिज, सीडी प्‍लेयर, आदि जैसे उत्‍पाद लॉन्‍च किये हैं। कंपनी कह रही है कि उन्‍हें पैसे के बदले में प्रॉडक्‍ट दिये जाएंगे, लेकिन हम कैसे विश्‍वास कर लें, जब कंपनी के खाते फ्रीज़ हैं, तो वो ये प्रॉडक्‍ट खरीदेंगे कहां से। इंद्रेश का 33 हजार रुपए स्‍पीक एशिया में फंसा है।

स्‍पीक एशिया में 22 हजार रुपए लगा चुके दीपक आर्या का कहना है कि सरकार को इसमें हस्‍तक्षेप करना चाहिये। केवल पुलिसिया कार्रवाई से कुछ नहीं होने वाला। कम से कम गरीबों का पैसा तो लैटा ही दिया जाना चाहिये। लखनऊ के ही अभय राज और रोहित गुप्‍ता का कहना है कि उन्‍हें विश्‍वास है कि एक ना एक दिन उनका पैसा जरूर वापस मिलेगा, क्‍योंकि पहले जब कंपनी आयी थी, तब उसने एक भी ग्राहक का पैसा नहीं मारा।

खैर ये तो रही निवेशकों की आप बीती, अब हम आपको ले चलते हैं मुंबई, जहां क्राइम ब्रांच सीओओ से पूछताछ कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक सीईओ मनोज कुमार का फिलहाल कोई अता-पता नहीं है। खबर है कि वो दुबई भाग गया है। मुंबई पुलिस अब उत्‍तर प्रदेश, मध्‍य प्रदेश और दिल्‍ली पुलिस से संपर्क कर रही है, ताकि एक संयुक्‍त ऑपरेशन चलाकर बाकी के सदस्‍यों को गिरफ्तार किया जा सके।

हम आपको बता दें कि अभी तक सिर्फ मुंबई में स्‍पीक एशिया के खिलाफ धोखा-धड़ी का मुकदमा दर्ज है। बाकी के शहरों में अभी तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। पढ़ें स्‍पीक एशिया से जुड़ी अन्‍य खबरें।

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