क्या जंतर-मंतर बन पायेगा अन्ना का जजंतरम-ममंतरम?
केंद्र सरकार ने लोकपाल बिल के लिए अपने ड्राफ्ट को मंजूरी देकर एक नया अध्याय शुरू कर दिया है। अध्याय शुरू हुआ है संसद भवन के कक्ष से, लेकिन खत्म कहां होगा? पता नहीं। हां यह जरूर है कि अध्याय में दिल्ली का जंतर-मंतर जरूर फोकस में आ गया है। एक तरफ यूपीए सरकार तो दूसरी तरफ अन्ना हजारे व देश की जनता। अनशन को लेकर चारों तरफ उठापटक शुरू हो चुकी है। अब देखना यह है कि 16 अगस्त को जंतर-मंतर अन्ना हजारे का जजंतरम-ममंतरम बन पायेगा?
आप सोच रहे होंगे कि जंतर-मंतर में जजंमरम-ममंतरम की बात कहां से आ गई। सच पूछिए तो जावेद जाफरी की फिल्म जजंतरम ममंतरम का अन्ना के इस अनशन से सीधा ताल्लुक है। फिल्म में जावेद जाफरी समुद्र के बीच खो जाता है और एक टापू पर जा पहुंचता है। वहां वो जमीन पर पड़ा था, तभी उसके हाथ के साइज के हजारों लोग उसके चारों तरफ इकठ्ठा होने लगते हैं। जावेद जाफरी टापू के लोगों की जिंदगी नरक बनाने वाले एक दानव को मार गिराता है। अंत में जावेद जाफरी टापू पर रहने वाले लोग खुशी से झूम उठते हैं।
अब अगर दिल्ली की बात करें तो जंतर-मंतर वही टापू है, जहां अन्ना हजारे (जावेद जाफरी) को 16 अगस्त को पहुंचना है। जाहिर है इस बार भी अन्ना के समर्थन में देश भर से लाखों लोग जंतर मंतर पहुंचेंगे। लोगों की अनुमानित संख्या दो से ढाई लाख बतायी जा रही है। देखा जाये तो जंतर-मंतर पर अन्ना के पास पहुंचने वाले लोगों का साइज भी फिल्म के टापू पर रहने वाले लोगों जितना है। जनता का कद इतना छोटा है कि पूरी तरह सक्षम होते हुए भी वह भ्रष्ट सरकार को उखाड़ कर फेंक नहीं पा रही है। उसके लिए अन्ना हजारे किसी गुलीवर से कम नहीं।
यह वही जनता है, जो भ्रष्टाचार रूपी दानव से त्रस्त हो चुकी है। यदि अन्ना हजारे सरकार के खिलाफ अनशन कर खुद की टीम द्वारा तैयार किये गये ड्राफ्ट को मंजूर कराने में कामयाब हो जाते हैं, तो नये लोकपाल विधेयक के साथ जनता को भ्रष्टाचार रूपी दानव से कुछ राहत जरूर मिलेगी। थोड़ी सी राहत भी जनता के लिए बड़ी खुशी होगी।
अब सवाल यह उठता है कि क्या जंतर-मंतर पर जजंतरम-ममंतरम बन पायेगी? अगर वर्तमान परिस्थितियों को देखें तो दिल्ली पुलिस ने 1 अगस्त से यहां धारा 144 लागू कर दी है। हालांकि पुलिस का एक पक्ष यह भी कह रहा है कि अन्ना हजारे को दिल्ली के मुनिस्पल कॉर्पोरेशन यानी एमसीडी से अनुमति लेनी होगी। उधर टीम अन्ना के सभी सदस्य दम भरकर कह रहे हैं कि चाहे कुछ भी हो जाये अन्ना का अनशन तो होकर रहेगा।
एक सवाल यह भी उठता है कि एक लाख से ज्यादा घरों तक जाकर समर्थन जुटा चुकी अन्ना की टीम अगर जंतर-मंतर पहुंच गई तो पुलिस उनके साथ कैसा बर्ताव करेगी। क्योंकि जून में बाबा रामदेव के साथ जो हुआ वो पूरी दुनिया ने देखा। दुनिया ने टीवी चैनलों पर साफ देखा कि किस तरह से पुलिस ने रामदेव व उनके समर्थकों पर किस तरह से लाठी-डंडे चलाये।
मजेदार बात यह है लोकपाल बिल का ड्राफ्ट कैबिनेट में पारित होने के बाद से अभी तक संप्रग का एक भी नुमाइंदा सामने नहीं आया है। गृह मंत्री पी चिदंबरम से लेकर कपिल सिब्बल तक किसी ने भी अन्ना के अनशन पर कोई टिप्पणी नहीं की है। इसे तूफान आने से पहले की खामोशी भी कहा जा सकता है।
वैसे यह बात तो तय है कि इसका प्रभाव मॉनसून सत्र पर जरूर पड़ेगा। संसदीय मामलों के मंत्री पवन कुमार बंसल का कहना है कि 1 अगस्त से शुरू हो रहे मॉनसून सत्र के तीसरे दिन लोकपाल बिल का ड्राफ्ट सदन में रखा जायेगा। उसके तुरंत बाद उसे पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी को भेज दिया जायेगा। जब मीडिया ने पूछा कि क्या सरकार इस बिल को पास कराने में सफल हो पायेगी, तो बंसल के पास कोई जवाब नहीं था।
;अब आपकी क्या राय है अन्ना के इस अनशन पर? नीचे कमेंट बॉक्स पर लिखें।













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