भूमि अधिग्रहण पर अपने ही घर में घिर गई मायावती

Mayawati opposes by her villagers on land acquisition
इलाहाबाद। हमारे देश के बड़े नेता अक्‍सर अपने चुनावी क्षेत्र या अपने गृहक्षेत्र का खूब विकास कराते हैं। इतना ही नहीं उस इलाके के लोगों को अपने मंत्री या नेता से बहुत उम्‍मीदें होती हैं। कुछ ऐसी ही उम्‍मीदें उत्‍तर प्रदेश के बादलपुर गांव के लोगों को थीं। गांव वालों को उम्‍मीद थी कि उनकी बिटिया उनके गांव का खूब विकास करांएगी। अरे क्‍योंकि उनके गांव की बिटिया राज्‍य की मुख्‍यमंत्री जो बन गई थीं। लेकिन गांव वालों की उम्‍मीदों के उलट उस बिटिया ने तो अपनों के ही घर छीनने का प्रोग्राम बना डाला। गांव वालों की उम्‍मीदों को जब झटका लगा तो वे अपना घर बचाने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाने जा पहुंचे।

अगर आप इस गांव को अब भी न पहचान पाए हों तो हम आपको बता दें कि हम बात कर रहे हैं मायावती के गांव बादलपुर की। यहां के किसान मायावती के भूमि अधिग्रहण के खिलाफ इलाहाबाद की शरण में पहुंचे हैं। हलाहाबाद हाईकोर्ट अब इनकी याचिका पर सुनवाई 17 अगस्‍त को करेगा। इस याचिका पर भी सुनवाई 17 अगस्‍त को की जाएगी जिस दिन न्यायमूर्ति अमिताभ लाला व न्यायमूर्ति अशोक श्रीवास्तव की खण्डपीठ नोएडा और ग्रेटर नोएडा के अन्‍य किसानों की भूमि अधिग्रहण मामले में भी फैसला सुनाएगी।

गौतमबुद्धनगर स्थित सुश्री मायावती के बादलपुर गांव से भी लगभग 50 किसानों गलत तरीके से किए गए भूमि अधिग्रहण को चुनौती दी है। बादलपुर के गांव वालों का कहना है कि उन्‍हें उम्‍मीद ही नहीं थी कि मायावती अपने ही गांव वालों के खिलाफ इस तरीके से गलत भूमि अधिग्रहण कराएंगी। उन्‍होंने पहले तो यह फैसला किया कि वह इस अधिग्रहण का विरोध नहीं करेंगे लेकिन इस अवैध अधिग्रहण की वजह से उनकी जमीनें कौडि़यों के भाव बिक रही थीं इस वजह से उन्‍होंने कोर्ट जाने का फैसला किया।

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