आसान नहीं है वॉल मार्ट का भारत में आना

बिहार की भी यही हालात है। नरेंद्र मोदी चुप हैं। मायावती ने अभी कोई साफ रुख जाहिर नहीं किया है। मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद, चेन्नई में ही रास्ता साफ दिख रहा है। हां यह जरुर है कि अगर ये स्टोर आ गए तो महंगाई से परेशान लोगों को राहत मिल सकती है। यहां जरूरी सामान की कीमत 30 फीसदी तक कम में मिलना संभव है। एफडीआई का विरोध करते हुए भाजपा ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार ऐसा करके छोटे दुकानदारों का निवाला छीनना चाहती है।
भाजपा प्रवक्ता सैयद शाहनवाज हुसैन ने कहा कि सरकार आर्थिक सुधारों के नाम पर गरीबों का रोजगार छीनना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका के एक बड़े नेता के दौरे के साथ ही सरकार ने रिटेल सेक्टर में एफडीआई की कोशिशें फिर से शुरू कर दी हैं। उन्होंने जानना चाहा कि सरकार आखिरकार किसके दबाव में है, जबकि वाणिज्य मंत्रालय से संबंधित संसदीय समिति इस मामले में पहले ही विरोध कर चुकी है।
सचिवों की कमेटी ने कहा था कि रिटेल कारोबार में 51 फीसदी निवेश को इजाजत दे दी जाए। ये फैसला अब कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। माना जा रहा जल्द ही यह कैबिनेट के सामने जाएगा। फिलहाल ये बड़ी दुकानें सिर्फ उन शहरों में खोलने की सिफारिश की गई है , जिनकी जनसंख्या 10 लाख से ज्यादा है। सरकार का मानना है किक इससे महंगाई से परेशान आम लोगों को काफी राहत मिल सकती है।
सचिवों की समिति की कैबिनेट सचिव अजित कुमार सेठ की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह मंजूरी का निर्णय किया गया था । वालमार्ट जैसी कई बड़ी खुदरा कंपनियां भारत के बहु-ब्रांड खुदरा क्षेत्र में पैर पसारने की प्रतीक्षा करती रही हैं। भारत का खुदरा क्षेत्र करीब 590 अरब डॉलर का होने का अनुमान है, जिसमें छोटे किराना दुकानदारों काबिज हैं।
केंद्र सरकार के प्रमुख वित्तीय सलाहकार की अगुवाई में बनी कमेटी का मामना है कि इससे रोजगार बढ़ेंगे और किसानों को उनकी फसल की बेहतर कीमत मिल सकेगी।












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