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लूट व हत्याओं की जांच की आंच अब माया के दरवाजे तक

Mayawti under scan in rising crime in UP
लखनऊ। परिवार कल्याण विभाग में लूट और हत्याओं की जांच की आंच अब मायावती के दरवाजे तक पहुंचने लगी है। इसी आंच से घबरायी प्रदेश की मुख्यमंत्री घबराहट में निर्णय लेने लगी हैं। सपा के इस बयान ने सत्ता पक्ष में बचैनी व गुस्सा बढ़ा दिया। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विपक्ष का यह बयान दुर्भाग्यपूर्ण हैं तथा इससे उनकी सोच का पता चलता है।

श्री मौर्य ने कहा कि मुख्य चिकित्सा अधिकारियों डा. विनोद कुमार आर्या एवं डा. बी.पी. सिंह की हत्या तथा परिवार कल्याण विभाग में वित्तीय अनियमितताओं की जांच सीबीआई को सौंपे जाने का निर्णय लिया जा चुका है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक पूर्वाग्रह से ग्रस्त विपक्षी पार्टियों को बसपा सरकार पर आरोप लगाने की आदत पड़ गयी है। उनका कहना था कि सरकार के इस निर्णय का स्वागत करने की बजाय विपक्षी उल्टी सीधी बयानबाजी कर रहा है। उन्होंने बताया कि मामले की प्राथमिक जांच पुलिस ने पूरी की और आरोप पत्र न्यायालय में पेश किए थे।

उन्होंने कहा कि देश के इतिहास में यह पहला मामला है जब पुलिस द्वारा आरोपपत्र दाखिल किये जाने के बावजूद किसी मामले को सीबीआई को सौंपा गया हो। श्री मौर्य ने कहा कि सरकार के इस निर्णय से वे लोग अवश्य निराश हुए जो विरोधी पार्टियों की शह पर याचिकाओं का दुरुपयोग करके अपने स्वार्थसिद्धि में लगे थे। उन्होंने जनता से अपील कि वह ऐसे दलाल प्रवृत्ति के लोगों से सावधान रहें।

उन्होंने कहा कि इन मामलों की अग्रेतर जांच सीबीआई को इसलिए सौंपी गयी है ताकि उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. वाई एस सचान की हत्या के मामले में वह तह तक पहुंचकर यह पता लगा सके कि डा. आर्या एवं डा. सिंह की हत्याओं का डा. सचान की हत्या से क्या सम्बंध है। उधर समाजवादी पार्टी का कहना है कि मुख्यमंत्री मायावती इन दिनों घबराहट में निर्णय ले रही हैं

क्योंकि अब परिवार कल्याण विभाग में लूट और हत्याओं की जांच की आंच अपने दरवाजे तक आने लगी है। पार्टी प्रवक्ता का कहना है कि डा. विनोद आर्या और डा. सिंह तथा डा. सचान की जेल में हत्या की सीबीआई जांच की मांग जब मृतकों के परिजन कर रहे थे तब मुख्यमंत्री इसके लिए राजी नहीं थीं, लेकिन अब जब हाई कोर्ट ने सख्ती दिखायी तो सरकार जांच को राजी हो गयी है।

उन्होंने कहा कि दरअसल वर्तमान घटनाक्रम सरकार की सोची समझी रणनीति के तहत की गयी कार्रवाई है जिसका उद्देश्य खुद को पाक साफ दिखाना है। उन्होंने कहा कि जिन दो मंत्रियों के इस्तीफे हुए हैं वे मुख्यमंत्री के अत्यन्त विश्वासपात्र कहे जाते हैं। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद सरकार ने विभागीय घोटाले में शामिल एक और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को बचाने की भरसक कोशिश की लेकिन अदालत की सख्ती पर वह जेल भेजे गये। सपा का कहना है कि अब जो मुख्यमंत्री जो भी निर्णय ले रही है वह परिस्थतियों के दबाव में ले रही हैं।

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