सेक्स वर्कर्स से ज्यादा समलैंगिकों से एड्स का खतरा
चंडीगढ़।
असुरक्षित समलैंगिक संबंध अन्य कारणों की बजाए एड्स के फैलाव में ज्यादा भूमिका निभाते है। पिछले आधे दशक में हरियाणा में समलैंगिकों का आंकड़ा अढ़ाई हजार से बढ़कर छह: हजार पर पहुंच गया है। तेजी से बढ़ रहे इस आंकड़े से एड्स की रोकथाम और उपचार कार्यक्रम में जुटी एकमात्र एड्स नियंत्रण सोसायटी सकते में है, क्योंकि असुरक्षित समलैंगिक संबंधों को एडस फैलाने में फीमेल सैक्स वर्कर से भी ज्यादा गंभीर माना जा रहा है। हरियाणा में एड्स को रोकने के लिए समलैंगिकों की पहचान को लेकर एक शिनाक्त कार्यक्रम भी चलाया जा चुका है, जिसमें उन समलैंगिकों का सहयोग लिया जा रहा है, जो एडस नियंत्रण समिति के संपर्क में है। id="toptextpromo">हरियाणा
एडस कंट्रोल सोसायटी के अनुसार एडस फैलाने के पीछे फीमेल सैक्स वर्कर की जगह असुरक्षित समलैंगिक संबंधों के दौरान पांच गुणा ज्यादा रिस्क है तथा फीमेल सेक्स वर्कर से ज्यादा ये फैलाव का कारण बनते है। एक एड्स ग्रसित व्यक्ति के संपर्क में आने के बाद किसी वेश्या द्वारा एड्स फैलाव को बढ़ावा मिलता है, जबकि ऐसी ही स्थिति असुरक्षित समलैंगिक संबंधों की है, लेकिन इनमें यह संभावना पांच गुणा तक पहुंच जाती है। id='are-slot-1' class='oiad oi-axt oiadv'> id='top-searched-articles'>पंचकुला
में है सबसे अधिक मामले समलैंगिक संबंधों के प्रति रूझान रखने वाले लोगों की संख्या में राज्य का पंचकुला जिला पहले नंबर पर आता है, जहां यह आंकड़ा एक हजार को पार कर चुका है, जबकि पांच वर्ष पूर्व इसकी संख्या चार सौ थी। अंबाला तथा सिरसा में समलैंगिकों की संख्या तीन सौ से कम, करनाल-यमुनानगर में डेढ़ सौ से ज्यादा, पानीपत-फरीदाबाद में आठ सौ से ज्यादा, महेंद्रगढ़ में एक सौ के आसपास, गुडग़ांव में पांच सौ से ज्यादा, रोहतक, हिसार, कैथल, जींद और फतेहाबाद में यह आंकड़ा तीन सौ तक पहुंच चुका है। हरियाणा एड्स कंट्रोल सोसायटी का मानना है कि समलैंगिक संबंध कोई मानसिक या शारीरिक रोग नहीं है, बल्कि जन्म से रूझान पर निभर व्यक्ति की गढऩ में शुमार हो चुकी है। पढें- हरियाणा की खबरें।











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