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यूपी: ऑडिट रिपोर्ट में खुल गयी एनआरएचएम घोटाले की पोल

Audit shows NRHM funds unaccounted for in UP
लखनऊ। परिवार कल्याण विभाग में करोड़ों का खेल होता रहा है। पर्दे के पीछे बैठे कई लोग सुनियोजित ढंग से इस कार्र्य को अंजाम देते रहे और जिम्मेदार अधिकारी सबकुछ देखने के बाद भी खामोश रहे। ऐसा क्यों हुआ इस सवाल का जवाब तो भले ही जांच टीमें खोज रही हों लेकिन केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ऑडिट टीम में एनआरएचएम में घोटाले की पोल खोल दी है। ऑडिट टीम ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि कार्य ठेकेदारों से नहीं कराए गए। कई कार्यो के ओपेन टेण्डर नहीं हुए जबकि ढेरों कार्यों के लिए अग्रिम भुगतान भी किए गए हैं। पूरी प्रक्रिया बताती है कि किस प्रकार करोड़ों के बजट की बंदर बांट की गयी।

ऑडिट टीम की रिपोर्ट यह बताने के लिए काफी है कि उत्तर प्रदेश में किस प्रकार सरकारी धन का दुरपयोग हुआ। आम जनता के स्वास्थ्य के लिए केन्द्र से आयी रकम की यहां के अधिकारियों ने किस प्रकार लूट की है। जांच टीम ने फैजाबाद, रायबरेली, उन्नाव, हरदोई, मिर्जापुर, चंदौली, सोनभद्र, सीतापुर, बाराबंकी, कानपुर देहात, सुल्तानपुर समेत ग्यारह जिलों का दौरा किया। टीम ने वहां उन आंकड़ों को जुटाने का प्रयास किया जिससे पता चलता था कि एनआरएचएम का धन किस प्रकार खर्च हुआ जनता को योजना का लाभ मिला या फिर योजनाएं सिर्फ कागजों पर निपटना दी गयीं।

टीम ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में उत्तर प्रदेश पांच हजार करोड़ रुपये से भी अधिक की धनराशि आवंटित की गयी जिसमें पचास फीसदी तो सिर्फ अधिकारियों ने ही लूट ली। बजट में कई स्तरों पर भ्रष्टाचार हुआ। योजनाओं का पैसातो अधिकारियों ने लूटा ही रोगी कल्याण समिति जिसका कार्र्य मरीजों के लिए दवाएं रखीदने का है उसके द्वारा भी करोड़ों की हेराफेरी की गयी। चार सौ पेजों में पेश की गयी रिपोर्ट में ऑडिट टीम ने बताया कि उपकरण व अन्य सामानों की खरीद के नाम पर करीब 250 करोड़ रुपये का अग्रिम भुगतान किया गया जिसमें चार एंजेन्सियां ऐसी रही जिन्हें दिया गया 68 करोड़ रुपया बगैर किसी कार्य के लिए लम्बे समय तक रहा जिसका ब्याज भी लाखों रुपयों में होगा।

जिन चार कम्पनियों को बगैर कार्य पैसा दे दिया गया उनमें यूपीएसआईसीएल, यूपीईसीएल, यूएनओपीएस व यूपीएलसीसीएल के नाम शामिल हैं। चिकित्सालयों में साफ पेयजल उपलब्ध कराने के नाम पर अधिकारियों ने 40 करोड़ रुपये खर्च कर दिए। जबकि विभिन्न कार्यों के लिए 11 ठेके दिए गये जिसमें से मात्र दो में ही 20 करोड़ का खर्च दिखा दिया गया।

पैसा किसके खाते में क्या कार्य कराया गया इसका कोई उचित लेखा जोखा चिकित्सालयों के पास उपलब्ध नहीं रहा। ऑडिट रिपोर्ट में जिस प्रकार यूपी में एनआरएचएम के धन की बंदर बांट उजागर हुई है उससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस खेल में कई बड़े नाम शामिल होंगे क्योंकि अकेले विभागीय अधिकारियों के बस की बात नहीं कि वह इतने बड़े घोटाले को अंजाम दे सकें। इन बड़े नामों ने ही पर्दे के पीछे से घोटाले का अंजाम दे दिया।

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