निवेशकों का 40 लाख लेकर सर्वे कम्पनी फरार

जीबी एशिया, एविसो पैसेफिक व एडवर्ड जैसी कम्पनियों के भागने के बाद अब राजधानी में एक और सर्वे कम्पनी का नाम सामने आया जिसने लोगों का लाखों रुपया ठग लिया। राजधानी के व्यक्ति की शिकायत पर जब पुलिस ने छानबीन की तो उसके हत्थे कम्पनी के दो एजेन्ट विशाल सिंह व राजेश पाठक लगे। राजेश व विशाल कम्पनी का नेटवर्क बढ़ाने का कार्य करते थे तथा लोगों को समझा बुझाकर उनका पैसा कम्पनी में निवेश कराते थे।
उन्होंने बताया कि लोगों को कम्पनी में पंजीकरण के लिए 4200 रुपये निवेश करने होते थे जिसके बदले में उन्हें प्रत्येक माह 2800 रुपये एक वर्ष तक दिया जाना था। पुलिस ने जब दोनों दलालों से कड़ाई से पूछताछ की तो पता चला कि अभी तक कम्पनी में लोगों ने करीब 40 लाख रुपये निवेश किए हैं। एजेन्टों ने बताया कि कम्पनी के शुरूआती दौर में कइयों का पैसा दिया जिस कारण निवेशकों का विश्वास कम्पनी पर जमता चला गया और धीरे-धीरे निवेश की रकम चालीस लाख तक पहुंच गयी।
पुलिस के अनुसार मामला तो उस वक्त खुला जब अभिषेक सिंह, काजमी रजा, बसंत कुमार व अजय कश्यप में एक समाज सेवी के माध्यम से पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करायी कि उन्होंने एक सर्वे कम्पनी में पंजीकरण कराया था लेकिन एक माह से उनका पैसा नहीं आ रहा है। पता चला कि कम्पनी का कार्यालय गोमती नगर विश्वास खण्ड में है जो कम्पनी के निदेशक उदय प्रताप सिंह व प्रबंध निदेशक आदित्य नारायण सिंह का आवास भी है।
पुलिस ने जब कार्यालय पर छापा मारा तो नया तथ्य सामने आया कि दोनों बोरिया बिस्तर समेट कर एक माह पूर्व ही कार्यालय में ताला लगा चुके हैं। हालांकि एजेंन्ट यह नहीं बता सके कि यदि कार्यालय एक माह पूर्व बंद हो गया था तो इस दौरान जो पैसा निवेश हुआ वह किसके खाते में गया। पुलिस ने राजेश व विशाल के कब्जे से कम्पनी के कई दस्तावेज बरामद कर लिए हैं जिसके आधार पर खोजबीन की जा रही है। एजेन्टों ने संभावना जतायी कि कम्पनी के निदेशक व प्रबंध निदेशक उत्तराखण्ड जा सकते हैं।
पुलिस उत्तराखण्ड पुलिस से सम्पर्क कर इस मामले की पड़ताल की कोशिश की बात कर रही है। पुलिस ने निवेशकों का आश्वासन दिया है कि उनका पैसा वापस दिलाने का प्रयास किया जाएगा। ज्ञात हो कि पिछले दिनों भागी एक अन्य सर्वे कम्पनी एडवर्ड का एक अधिकारी जो लाखों रुपया लेकर राजधानी और पुलिस के हत्थे चढ़ा उस पर भी पुलिस ने किसी भी निवेशक को उनका पैसा लौटाने में मदद नहीं की।












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