दिल्ली: पत्नी के हत्यारे को उम्र कैद

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि हत्या का हर मामला गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। बावजूद इसके हर केस में मौत की सजा नहीं दी जा सकती। हत्या के रेयरेस्ट ऑफ रेयर मामलों में ही मौत की सजा दिए जाने का प्रावधान है। अदालत ने मृतका की भांजी फरहा के बयान को अहम माना।फरहा ने पुलिस को बयान दिया था कि वह शाहजहांपुर से अपनी खाला रेशमा के बीमार होने के कारण उसके घर दिल्ली आई थी। उसका मौसा रेशमा को अपने सौतेले बेटे रिजवान से बातचीत करने से मना करता था। इस बात को लेकर अकसर दोनों के बीच झगड़ा होता रहता था। उसे शक था की रेशमा औऱ रिजवान में संबंध है।
12 जुलाई 2008 की रात कमरे में चीखने की आवाज आई तो फरहा ने लाइट जलाई तो देखा कि उसका मौसा उसकी मौसी की छाती पर बैठा हुआ है। उसकी मौसी के गले में चुन्नी लिपटी हुई थी और उसके मुंह से खून बह रहा था। उसने शोर मचाया तो आसपास के लोग वहां पहुंच गए। इस बीच मौका पाकर गुलजार भाग गया। बाद में पुलिस ने उसे पकड़ लिया।












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