सीएमओ हत्याकाण्ड में पुलिस ने अपनी पहली जांच रिपोर्ट बदली

यूपी पुलिस किसी भी वक्त कुछ भी कर सकती है। कुछ समय पूर्व तक डा. वाई एस सचान की मौत को आत्म हत्या करार देने पर तुली पुलिस अब यह मान रही है कि उनकी जेल में हत्या की गयी। डा. विनोद कुमार आर्या और डा. बीपी सिंह की हत्या के मामले में पुलिस ने नया आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। जांच एजेन्सी ने एक लाख रपये के इनामी सुधाकर पाण्डेय और विजय दुबे का आर्या हत्याकाण्ड में नाम नहीं हटाया है।
पुलिस ने दावा किया कि इन लोगों को भी सुपारी दी गई थी लेकिन हत्या दूसरे शूटरों द्वारा की गई। दोनों सीएमओ की हत्या करने वाले शूटर एक ही थे। शूटरों ने पहले डा. आर्या को गोली मारी बाद में डा. बी.पी. सिंह उनका निशाना बने। पुलिस सूत्रों के अनुसार अलीगंज पुलिस को उस समय झटका लगा जब एसटीएफ ने डा. बी.पी. सिंह हत्याकाण्ड में कई नयी बातें बता दी।
एसटीएफ के अनुसार डा. सचान ने डा. आर्या की हत्या की सुपारी दी थी। तथा यह काम आर.के. वर्मा, आनंद तिवारी और विनोद शर्मा ने मिलकर अंजाम दिया। पुलिस ने हत्यारों के पास से असलहे की बरामदगी तो दिखायी ही साथ ही बैलिस्टिक जांच रिपोर्ट में यह बात साबित भी हो गयी कि दोनों हत्याएं एक ही असलहे से की गयीं। पुलिस ने डा. आर्या हत्याकाण्ड में विशेष न्यायाधीश
गैंगेस्टर की अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। आरोप पत्र दाखिल करते वक्त झूठी साबित हुई क्योंकि उसने पुराने आरोप पत्र में दिए गये नामों को हटाकर नये नाम शामिल हुए। पूर्व के नामों पुलिस ने अभय सिंह, अजय कुमार मिश्रा, अमित दीक्षित और उसके भाई सुमित दीक्षित के नाम आरोप लगाए थे।
ज्ञात हो कि हत्या के आरोप में ये पहले से जेल में बंद हैं। पुलिस ने अब सुधाकर पाण्डेय और विजय दुबे का नाम आरोप पत्र में लिख दिया है। पुलिस का कहना है कि डा. आर्या को मारने के लिए उपरोक्त लोगों को सुपारी दी गई थी। पुलिस भले ही तीन माह से अभय सिंह के नाम का सहारा लेकिर पीडि़त पक्ष के लोगों को जांच का आश्वासन दे रही थी लेकिन उसके हाथ ऐसाकोई भी सबूत नहीं लगा था जिसके आधार पर कहा जाता है कि इस मामले में अभय सिंह का हाथ है। हालांकि अब जब पूरा मामला सीबीआई को सौंप दिया गया तो पुलिस अपनी इज्जत बचाने का प्रयास कर रही है। पुलिस ने स्वीकार किया कि उसके पास अभय ङ्क्षसह, अजय कुमार मिश्रा, अमित दीक्षित और सुमित दीक्षित के खिलाफ कोई सबूत नहीं है। पुलिस ने इन अभियुक्तों की गैंगेस्टर एक्ट के तहत रिमाण्ड रद्द किए जाने की अपील की है। विशेष न्यायाधीश ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया।












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